Gujarat polls: गुजरात में आम आदमी पार्टी कितनी बड़ी चुनौती ? जानें भाजपा और कांग्रेस ने क्या कहा

Gujarat Election 2022: आम आदमी पार्टी ने खुद को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा के लिए मुख्य चुनौती के रूप में पेश करने की बात कही है. जानें आप के इस दावे पर भाजपा और कांग्रेस की क्या है प्रतिक्रिया

Gujarat polls: गुजरात विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है. इस बार कांग्रेस और भाजपा के अलावा चुनावी मैदान में आम आदमी पार्टी (आप) भी है जिसने सभी सीट से उम्मीदवार उतारने की बात कही है. आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अकेले गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में लगभग एक दर्जन रोड शो किया है और पार्टी के पक्ष में लोगों से मतदान करने की अपील की है. इसुदन गढ़वी को आप ने गुजरात में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है. अरविंद केजरीवाल दिल्ली और पंजाब के बाद गुजरात में सरकार बनाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं.

आप को कांग्रेस और भाजपा ने किया खारिज

आप ने खुद को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए मुख्य चुनौती के रूप में पेश करने की बात कही है. भाजपा गुजरात में 27 वर्षों से सत्ता पर काबिज है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का गुजरात गृह राज्य है यहीं वजह है कि भाजपा यहां पूरा जोर लगा रही है. हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही आप को खारिज करते नजर आते हैं. अमित शाह पिछले दिनों कह चुके हैं कि चुनावी मुकाबला केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी कह चुके हैं कि कांग्रेस सक्रिय रूप से गुजरात चुनाव लड़ रही है और जीतना तय है. आप के पास जमीन पर कुछ भी नहीं है. ये केवल पोस्टर में नजर आते हैं.

2017 का चुनाव

कांग्रेस ने 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अपना बेहतर प्रदर्शन किया था और विधानसभा की 182 में से 77 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि भाजपा ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद कुछ कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया और भाजपा की संख्या बढ़कर 111 हो गयी.

आप का वादा

आप की ओर से कई वादे गुजरात की जनता से किये गये हैं. जैसे प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली, सभी महिलाओं को 1,000 रुपये का मासिक भत्ता और सत्ता में आने पर बेरोजगार युवाओं को 3,000 रुपये का मासिक भत्ता देने का वादा पार्टी कर चुकी है. यही नहीं कांग्रेस और आप दोनों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का वादा किया है. अरविंद केजरीवाल ने चुनाव को भाजपा और आप के बीच सीधी लड़ाई के रूप में पेश किया है और कई बार कांग्रेस को जीरो बताया है. पिछले दिनों वह कह चुके हैं कि अनुमान है कि कांग्रेस को 13% से कम वोट शेयर चुनाव में प्राप्त होगा. उन्होंने कांग्रेस समर्थकों से पार्टी को वोट देकर अपना वोट बर्बाद नहीं करने को कहा.

गुजरात में मोदी का प्रभाव

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जूनागढ़ में एक रोड शो के बाद कह चुके हैं कि आपने भाजपा को शासन करने के लिए 27 साल दिये हैं. कृपया मुझे पांच साल दें. यदि कोई काम नहीं हुआ तो मैं अगली बार वोट मांगने नहीं आऊंगा. इधर भाजपा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और अमित शाह जैसे अपने स्टार प्रचारकों द्वारा रोड शो कराकर वोटरों को रिझाने का प्लान तैयार कर रही है. गुजरात में नरेंद्र मोदी का अपना प्रभाव भी है जो भाजपा के पक्ष में वोट को कन्वर्ट करने में मदद करेगा.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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