नमाज पर प्रतिबंध के बाद भोजशाला मंदिर परिसर में पहली बार शुक्रवार को हुई पूजा, सुरक्षाकर्मी मुस्तैद

Bhojshala Dhar : भोजशाला मंदिर परिसर में शुक्रवार की नमाज पर प्रतिबंध के बाद पहली बार यहां शुक्रवार को नमाज नहीं हो रही है और पूजा के लिए श्रद्धालु पहुंचे हैं. इस मौके पर यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

Bhojshala Dhar : माता सरस्वती के मंदिर में कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार पूजा-अर्चना हुई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे. इस मौके पर मंदिर परिसर में शंख ध्वनि सुनाई दी और भक्तों ने पूजा की. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यहां नमाज पर रोक लगा दी है, कोर्ट का यह आदेश 15 मई को आया था.

शुक्रवार सुबह हुई मंदिर में आरती

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद धार में देवी सरस्वती को समर्पित भोजशाला मंदिर में सुबह की आरती हुई और माता का जयकारा भी हुआ. कोर्ट के आदेश के बाद यहां शुक्रवार के नमाज की इजाजत नहीं है.भोजशाला मंदिर में दर्शन करने आई एक भक्त विद्या सोनी ने एएनआई न्यूज एजेंसी को बताया कि हम आज सुबह अपना सारा काम छोड़कर भोजशाला आए हैं. हम बहुत खुश हैं. ऐसा पहली बार हुआ है जब हम शुक्रवार को यहां आ पाए हैं. यह सत्य की जीत है, हमने काफी लंबी लड़ाई लड़ी है. वहीं दूसरी भक्त ज्योति सोनी ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लग रहा है, यह पहली बार है जब हम शुक्रवार को यहां दर्शन करने आ पाए हैं.पहले सिर्फ मंगलवार को ही यहां आ सकते थे या फिर वसंत पंचमी के दिन.

सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

धार के एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद, सभी नियमों का सख्ती से पालन करवाना हमारी ड्यूटी है. हमने सभी से संपर्क बनाए रखा है और सभी ग्रुप्स के साथ लगातार मीटिंग की हैं. सभी ने भरोसा दिलाया है कि कोर्ट के आदेश का पालन होगा. मंदिर के बाहर लगभग 1800 से ज्यादा पुलिसवालों को तैनात किया गया है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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