बाबा रामदेव ने कहा-जो सनातन को गाली दे रहे हैं, वे 2024 में भूत, पिशाच और ब्रह्मराक्षस बनकर दूसरे लोक जाएंगे

रामदेव बाबा ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म पर जातिवादी होने का लांछन लगाते हैं, वे कुंठित बुद्धि वाले हैं. जो लोग सनातन धर्म को भेदभाव वाला बताते हैं वे एक एजेंडे के तहत काम कर हैं.

Sanatan dharm : जो लोग सनातन को गालियां दे रहे हैं, जो सनातन को खत्म करने की बात कर रहे हैं, वे 2024 में खत्म हो जाएंगे, उनका मोक्ष हो जाएगा. उनमें से कुछ भूतप्रेत, पिशाच और ब्रह्मराक्षस बनकर दूसरे-तीसरे लोक में पहुंच जाएंगे. उक्त बातें आज योग गुरु रामदेव बाबा ने सनातन धर्म पर जारी विवाद के बीच कही. रामदेव बाबा ने कहा कि यह सनातन का गौरव काल है. गुलामी की निशानियों को मिटाकर, आत्मग्लानि और कुंठाओं से निकलकर देश को पराक्रम की ओर ले जाने का काल है.

सनातन को गाली देने वाले एजेंडे के तहत काम कर रहे

रामदेव बाबा ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म पर जातिवादी होने का लांछन लगाते हैं, वे कुंठित बुद्धि वाले हैं. जो लोग सनातन धर्म को भेदभाव वाला बताते हैं वे एक एजेंडे के तहत काम कर हैं. ये लोग सुपारी लेकर विदेशी ताकत के बल पर सनातन को बदनाम कर रहे हैं, उसे खत्म करना चाहते हैं. सनातन धर्म में जाति नहीं कर्म का महत्व है. ब्राह्मण का अर्थ जाति नहीं है, बल्कि जो अज्ञान को मिटाता है, वो ब्राह्मण है. जो अन्याय का अंत करता है वो क्षत्रिय है.


हम भारत वाले हैं: बाबा रामदेव

सनातन धर्म में स्त्री-पुरुष का भी कोई भेदभाव नहीं है. ये लोग सनातन को बदनाम करना चाहते हैं, ये लोग एजेंडे की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन इन असुरों का नाश होगा. इंडिया और भारत विवाद पर रामदेव बाबा ने कहा कि 15 साल पहले हमने मेड इन भारत लिखा था. ऐसा लिखने वाले हम पहले संस्थान थे. हम भारत वाले हैं, भारत में आयुर्वेद है, वेद है और बहुत कुछ है, हम उनपर गर्व करते हैं.

विपक्षी गठबंधन पर हमला

ज्ञात हो कि डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कुछ दिनों पहले सनातन धर्म पर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यह धर्म भेदभाव पूर्ण है इसलिए इसका अंत होना चाहिए. उन्होंने सनातन धर्म की तुलना बहुत ही आपत्तिजनक अंदाज में की थी, जिसके बाद विवाद हो गया था. बीजेपी ने उदयनिधि स्टालिन के बयान की आड़ में विपक्षी गठबंधन को निशाने पर लिया. बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर सोनिया गांधी से कई सवाल किए और विपक्षी गठबंधन के पर हमला बोला. उन्होंने यह कहा कि क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां सिर्फ सनातन धर्म की निंदा कर सकती हैं, किसी और धर्म पर टिप्पणी करने की ताकत उनके अंदर नहीं है.

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सनातन को क्यों खत्म किया जाए

उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है कि अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ नफरत फैलाना नहीं है. सनातन एक ऐसा धर्म है जो शाश्वत कर्तव्यों का समूह है, जो देश के लोगों, राजा, माता-पिता और गुरुओं के प्रति कर्तव्य परायणता सिखाता है. इसमें गरीबों की देखभाल करना भी शामिल है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इसे क्यों नष्ट किया जाना चाहिए? सनातन धर्म पर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने भी अपना अलग रुख अख्तियार कर लिया है. वो काफी सतर्कता के साथ इस मसले पर बयान दे रही है. कांग्रेस ने अपने नेताओं को आदेश दिया है कि वे बीजेपी के एजेंडे का शिकार ना हों.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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