Asaduddin Owaisi vs Nishikant Dubey: विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया. समर्थन में 50 से अधिक सदस्य खड़े हुए, जिसके बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इस संकल्प को प्रस्तुत करने की अनुमति दी. जिसके बाद सदन में चर्चा शुरू हुई. लेकिन संकल्प पेश किए जाने से पहले एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर सवाल उठा दिया. ओवैसी के बोलने के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे उठे और उनको काउंटर किया. जिसके बाद सदन में कुछ देर हंगामा भी हुआ.
जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर क्या बोले ओवैसी?
जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने लोकसभा की कार्य प्रक्रिया के नियम 376 और संविधान के अनुच्छेद 96 का हवाला देते हुए कहा- ओम बिरला ने जगदंबिका पाल की नियुक्ति की है, ऐसे में पाल पीठासीन सभापति की भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकते.कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने ओवैसी की बात का समर्थन किया. ओवैसी ने कहा- सदन को एक व्यक्ति का चयन करना चाहिए जो कार्रवाई का संचालन करे.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ओवैसी को दिया करारा जवाब
ओवैसी को करारा जवाब देते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा- बड़े विद्वान आदमी हैं ओवैसी साहब…संविधान का हवाला देते हुए दुबे ने कहा- लगता है बैरिस्टर साहब ने संविधान के अनुच्छेद 95 (2) को पूरा पढ़ा ही नहीं है. दुबे ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जो भी आसन पर होगा उसे अध्यक्ष की तरह अधिकार होगा. बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा- सदन के नियम के तहत जिन्हें पीठासीन सभापति नियुक्त किया गया है उसे सदन संचालन का पूरा अधिकार है. जगदंबिका पाल ने कहा कि अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं है और ऐसे में व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जाना चाहिए.
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