Article 370: पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ 11 जुलाई को करेगी सुनवाई

मालूम हो आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने अनुच्छेद 370 को लेकर याचिका दायर की है. वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारी फैसल अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में अव्वल आने वाले पहले कश्मीरी हैं. उन्हें संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद एक साल से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया था.

जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के करीब चार साल बाद केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.

सीजेआई सहित पांच जजों की बैंच करेगी सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल हैं.

आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने की थी याचिका दायर

मालूम हो आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने अनुच्छेद 370 को लेकर याचिका दायर की है. वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारी फैसल अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में अव्वल आने वाले पहले कश्मीरी हैं. उन्हें संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद एक साल से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया था. उन्होंने सेवा से इस्तीफा दे दिया था और जनवरी 2019 में एक राजनीतिक पार्टी ‘जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ की शुरुआत की थी. सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था और पेशे से डॉक्टर फैसल को बाद में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय में तैनात किया गया था.

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फैसल ने याचिका से उनका नाम हटाने की मांग की है

फैसल ने पिछले साल अप्रैल में एक आवेदन दायर कर उन सात याचिकाकर्ताओं की सूची से अपना नाम हटाने का आग्रह किया था, जिन्होंने संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को चुनौती दी है.

पांच अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया था

पांच अगस्त, 2019 को, केंद्र ने पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. अनुच्छेद-370 समाप्त करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गई थीं.

अनुच्छेद 370 पर सुनवाई से खुश हैं उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती

इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सुनवाई को लेकर आशान्वित हैं. वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के शीर्ष अदालत के फैसले का सोमवार को स्वागत किया.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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