सरहदों में बंटी बेबी अरिहा की जिंदगी, जर्मनी के फॉस्टर केयर में मासूम, भारत में तड़प रहे माता-पिता
Ariha Shah Case: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के दौरान एक बार फिर 5 साल की मासूम अरिहा का मामला सुर्खियों में है. अरिहा वही बच्ची है, जो पिछले करीब 40 महीनों से जर्मनी के फोस्टर केयर में रह रही है. उधर, उसके माता-पिता भारत में बच्ची से मिलने की आस में दर-दर भटक रहे हैं और भारत व जर्मनी, दोनों सरकारों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अरिहा की कहानी क्या है और कैसे उसकी मासूम जिंदगी सरहदों के बीच उलझ कर रह गई है.
Ariha Shah Case: मासूम अरिहा की दास्तान किसी भावुक फिल्मी कहानी से कम नहीं है. महज सात महीने की उम्र में ही अरिहा को अपने माता-पिता से अलग कर दिया गया, वजह बनी बच्ची को लगी चोट. अरिहा की कहानी उसके पिता भावेश शाह की नौकरी से शुरू होती है. गुजरात निवासी भावेश शाह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. साल 2018 में उन्हें जर्मनी में एक बेहतरीन नौकरी का अवसर मिला, जिसके बाद वह अपनी पत्नी धरा शाह के साथ भारत छोड़कर जर्मनी में बस गए. कुछ साल बाद, 2021 में उनके जीवन में खुशियों ने दस्तक दी और एक नन्ही बच्ची ने जन्म लिया, जिसका नाम उन्होंने अरिहा रखा.
खुशी का माहौल गम में बदला, 7 महीने में अरिहा हो गई माता-पिता से अलग
भावेश और धरा शाह के घर अरिहा के जन्म से खुशियों की रौनक लौट आई थी. लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी. एक दिन अरिहा अपनी नानी की गोद में खेल रही थी, तभी अचानक उसे चोट लग गई. इस चोट का पता तब चला, जब उसकी मां डायपर बदल रही थी. बच्ची के शरीर से खून बहता देखकर माता-पिता घबरा गए और बिना देर किए उसे अस्पताल ले गए. उन्हें उम्मीद थी कि डॉक्टर इलाज करेंगे और अरिहा जल्द ठीक हो जाएगी, लेकिन वहां जो हुआ, उसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. इलाज के दौरान डॉक्टरों को आशंका हुई कि बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है. इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी को इसकी सूचना दे दी. एजेंसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अरिहा को अपनी कस्टडी में ले लिया और उसे माता-पिता से अलग कर दिया. यहीं से उस परिवार के लिए एक लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई की शुरुआत हो गई.
कोर्ट में चला यौन शोषण का केस, खारिज होने पर भी अरिहा माता-पिता के पास नहीं लौटी
जर्मनी की एक अदालत में अरिहा से जुड़े कथित यौन शोषण मामले की सुनवाई हुई. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने यौन शोषण से जुड़े आरोपों को खारिज कर दिया. जांच में यह स्पष्ट हो गया कि अरिहा के साथ किसी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ था. इसके साथ ही बच्ची के माता-पिता पर दर्ज किया गया मामला भी समाप्त कर दिया गया. हालांकि, इसके बावजूद चाइल्ड केयर विभाग ने बच्ची को उसके माता-पिता को सौंपने से इनकार कर दिया. विभाग का कहना था कि भले ही यौन शोषण के आरोप सही नहीं पाए गए, लेकिन माता-पिता द्वारा बच्ची के साथ हिंसक व्यवहार किया गया था. इसी आधार पर कोर्ट ने भावेश और धरा से अरिहा की पेरेंटिंग राइट छीनने का फैसला सुनाया.
भारत और जर्मन सरकार हमारी छोटी बच्ची के अधिकारों की रक्षा करे: अरिहा की चाची
ANI को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में, बच्ची अरिहा की चाची किंजल शाह ने कहा, 4.5 साल पहले, अरिहा को जर्मनी में फॉस्टर केयर में ले लिया गया था क्योंकि जर्मन चाइल्ड सर्विसेज को गलतफहमी हुई थी, जिसकी वजह से उन्होंने उसके माता-पिता पर कुछ आरोप लगाए थे. हालांकि, अब उनकी अपनी कोर्ट ने माता-पिता को सभी आरोपों से बरी कर दिया है. आज माता-पिता पर कोई आरोप नहीं है. वे भारत या किसी भी दूसरे देश की यात्रा कर सकते हैं. सिर्फ हमारी बच्ची ही अपनी मर्जी के खिलाफ वहां फंसी हुई है. हम अनुरोध करते हैं कि भारतीय और जर्मन सरकारें हमारी छोटी बच्ची के अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत करें.
बच्ची अरिहा का पालन-पोषण जितना हो सके भारतीय माहौल में हो : विदेश सचिव विक्रम मिसरी
अरिहा शाह के मुद्दे पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, हम काफी समय से जर्मन सरकार, सभी जर्मन अधिकारियों, दिल्ली में उनके दूतावास और बर्लिन में जर्मन सरकार और इसमें शामिल सभी एजेंसियों के साथ बातचीत कर रहे हैं. यह मामला, एक समय पर एक कानूनी मामला था, लेकिन हमारा मानना है कि आखिरकार इसे इसमें शामिल मानवीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए. हम परिवार की परेशानी और मुश्किलों को समझते हैं. हम स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं, और हम हर संभव तरीके से उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. हम यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि बच्ची अरिहा का पालन-पोषण जितना हो सके भारतीय माहौल में हो, चाहे वह भारतीय लोगों के साथ बातचीत करना हो या जर्मनी में मनाए जाने वाले भारतीय त्योहारों में हिस्सा लेना हो. हम उसके लिए हिंदी सीखने की व्यवस्था करना चाहेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बारे में चांसलर से बात की थी, इसलिए हम इस मुद्दे पर जर्मन सरकार के साथ फॉलो-अप करते रहेंगे, और हम हर कदम पर परिवार के साथ रहेंगे.
