Anti Paper Leak Bill : रिजिजू ने कहा- विपक्ष बिल पर बात नहीं कर रहा, राहुल गांधी अभद्र भाषा का कर रहे हैं प्रयोग

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया है. उन्होंने राहुल गांधी के अभद्र भाषा के प्रयोग पर भी चिंता जताई है.

पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक जैसे जरूरी बिल पर चर्चा हो रही है, लेकिन कांग्रेस के सदस्य बिल पर कोई बात नहीं कर रहे हैं. वे सिर्फ राजनीति करने में व्यस्त रहे हैं.

किरेन रिजिजू ने कहा-हमें उम्मीद है कि आज राहुल गांधी और दूसरे लोग बिल पर बोलेंगे. यह बिल स्टूडेंट्स की मांगों के जवाब में लाया गया है और प्रधानमंत्री के बड़े फैसले से स्टूडेंट्स में एक नया कॉन्फिडेंस आया है. अगर कांग्रेस पार्टी के पास एग्जाम प्रोसेस के बारे में कोई और सुझाव है, तो वे दे सकते हैं.

अलोकतांत्रिक और अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं राहुल गांधी


किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधीहर तरह की अनडेमोक्रेटिक और गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में बातचीत के लिए सही नहीं है. हमें सभ्य भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए. हम एक-दूसरे से अलग राय रख सकते हैं, लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी अभद्र और बेइज्जती करने वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह डेमोक्रेसी और हमारे देश के लिए अच्छा नहीं है.

प्रियंका गांधी ने भी बिल के दायरे से बाहर बातें की


मंत्री रिजिजू ने कहा कि मंगलवार को प्रियंका वाड्रा ने भी चर्चा में हिस्सा लिया. लेकिन वे बिल के दायरे से पूरी तरह बाहर के मामलों पर बात करती रहीं. विपक्ष के हर सांसद ने असली बिल पर बात किए बिना चर्चा में भागीदारी की. चूंकि उन्होंने बिल पर बात नहीं की, इसलिए मुझे आज उम्मीदें है कि राहुल गांधी कुछ सुझाव देंगे. मुझे उम्मीद है कि 20 या 30 मिनट के भाषण में वह कम से कम 5 मिनट बिल के बारे में बोलेंगे. इतने जरूरी बिल पर बोलने से बचना ठीक नहीं है.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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