किसी सरकार ने सावरकर को वीर की उपाधि नहीं दी थी. इस देश की जनता ने उन्हें वीर नाम दिया था. उनकी देशभक्ति और निष्ठा को देखते हुए उन्हें यह उपाधि दी गयी थी. आज उनकी देशभक्ति पर सवाल उठ रहे हैं. यह दुखद है कि जिस आदमी को आजादी की लड़ाई के दौरान दो बार आजीवन कारावास की सजा दी गयी आज उनकी निष्ठा और देशभक्ति पर सवाल उठाये जा रहे हैं.
गृह मंत्री अमित शाह ने आज सेल्युलर जेल में भारत और इसके स्वतंत्रता संग्राम के लिए वी डी सावरकर की प्रतिबद्धता पर संदेह करने वाले लोगों पर हमला बोलते हुए उक्त बातें कहीं. अमित शाह ने यह टिप्पणी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर दी है जिसमें उन्होंने कहा था वी डी सावरकर ने महात्मा गांधी की सलाह पर अंग्रेजों के समक्ष दया याचिका दाखिल की थी.
अमित शाह ने कहा कि इस जेल में तेल निकालने के लिए कोल्हू के बैल की तरह पसीना बहाने वाले और आजीवन कारावास की दो सजा पाने वाले व्यक्ति की जिंदगी पर आप कैसे शक कर सकते हैं. इस जेल में भारत के लंबे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों को कैद किया गया था.
शाह ने कहा कि सावरकर के पास वह सब कुछ था, जो उन्हें अच्छे जीवन के लिए चाहिए होता, लेकिन उन्होंने कठिन रास्ता चुना, जो मातृभूमि के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है. भारत की आजादी के 75 साल के जश्न के तहत सरकार आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है और इसी के तहत यह कार्यक्रम आयोजित था.
Posted By : Rajneesh Anand
