Uttar Pradesh News: कानपुर की एक विशेष अदालत ने नाबालिग साली से छेड़छाड़ के आरोप में फंसे भारतीय वायुसेना के एक जवान को बरी कर दिया है. अदालत ने यह फैसला कथित पीड़िता के उस बयान के बाद सुनाया, जिसमें उसने कहा कि यह घटना ‘सपने में हुई थी’ और उसने गलतफहमी में शोर मचा दिया था. हालांकि, इस मामले में आरोपी जवान को करीब 19 दिन जेल में भी बिताने पड़े थे.
बिठूर निवासी एयरफोर्स कर्मी की शादी 10 फरवरी 2019 को बिधनू क्षेत्र की एक युवती से हुई थी. शादी के बाद 13 फरवरी को वह ‘चौथी’ की रस्म के लिए पत्नी को लेने ससुराल गया था. इसी दौरान उसकी 15 वर्षीय साली भी उनके साथ आ गई. दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, 8 मार्च की रात करीब 9 बजे किशोरी अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगी. उसकी आवाज सुनकर बड़ी बहन कमरे में पहुंची. वहां किशोरी ने आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसके साथ छेड़छाड़ की है. इसके बाद बड़ी बहन ने पुलिस को सूचना दी.
2019 में दर्ज हुआ था मामला
बचाव पक्ष के वकील करीम अहमद सिद्दीकी ने बुधवार को पीटीआई-भाषा को इस मामले पर अपडेट दिया. उन्होंने बताया कि 15 वर्षीय लड़की ने आरोप लगाया था कि 8 मार्च 2019 को नौबस्ता खादेपुर में अपनी बहन के ससुराल में सोते समय उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उसके साथ छेड़छाड़ की.
लड़की के आरोपों के आधार पर करीब पांच महीने बाद 3 अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
पॉक्सो कोर्ट में अनुराग के ऊपर मारपीट, बदनाम करने, छेड़छाड़, और पीड़िता पर लैंगिक हमला करने के आरोप तय किए गए थे. उनके ऊपर आरोप लगा कि वे अपने पिता के साथ फरार हो गए.
जमानत से पहले 19 दिन जेल में रहे
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुराग शुक्ला को 29 सितंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया. हालांकि, बाद में 17 अक्टूबर 2019 को उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन इससे पहले उन्हें करीब 19 दिन जेल में रहना पड़ा.
सुनवाई के दौरान बदला पीड़िता का बयान
सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत को बताया कि घटना की रात 9 बजे थे. वह एंटीबायोटिक दवाएं लेकर सोई हुई थी, दवा की वजह से वह आधी बेहोशी की स्थिति में थी. उसने कहा कि उसी हालत में उसे सपने में महसूस हुआ कि उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उसे पकड़ लिया और छेड़छाड़ की. इसके बाद वह डरकर जाग गई और शोर मचा दिया.
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परिवार ने भी बताया गलतफहमी
लड़की के पिता और बड़ी बहन ने भी अदालत में बयान दिया कि शुक्ला के खिलाफ शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी.
सात साल बाद खत्म हुई कानूनी लड़ाई
विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश रश्मि सिंह ने 7 मार्च को अनुराग शुक्ला को बरी कर दिया. इसके साथ ही करीब सात साल तक चली कानूनी लड़ाई समाप्त हो गई.
करियर और प्रतिष्ठा पर पड़ा असर
अनुराग शुक्ला ने फोन पर बताया कि इस मामले के कारण उन्हें काफी मानसिक तनाव झेलना पड़ा और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा व करियर को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा कि इस मुकदमे के चलते वह 2020 में कॉर्पोरल पद पर पदोन्नति नहीं पा सके और उन्हें लीडिंग एयरक्राफ्टमैन के रूप में ही काम करना पड़ा.
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संपत्ति विवाद का भी लगाया आरोप
शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया. उनका दावा है कि उनके ससुर विजय तिवारी चाहते थे कि वह अपनी जमीन, घर और अन्य संपत्ति अपनी पत्नी और साली के नाम कर दें. उनके अनुसार, इसी वजह से उन्हें इस मामले में फंसाया गया.
