Aditya Thackeray on Bankipur Bypoll : शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताया. उन्होंने कहा कि अब देश में बदलाव की हवा चल चुकी है और जहां भाजपा पिछले 20-25 वर्षों से चुनाव नहीं हार रही थी, वहां भी हार का सामना करना पड़ रहा है. आदित्य ठाकरे ने कहा कि भाजपा नेताओं का यह दावा कि पार्टी का कोई भी उम्मीदवार चुनाव जीत जाएगा, अब गलत साबित होता दिख रहा है.
उन्होंने राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वालों को हिंदू विरोधी बताना गलत है. आदित्य ठाकरे ने कहा, "अधूरे राम मंदिर का उद्घाटन करना, शंकराचार्यों और राष्ट्रपति को उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाना क्या हिंदू विरोधी नहीं है? अगर राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगते हैं तो उस पर सवाल उठाना हिंदू विरोधी कैसे हो गया?" उन्होंने दावा किया कि पप्पू यादव इसी मुद्दे को उठा रहे थे, इसलिए उन्हें चुप कराने की कोशिश की जा रही है.
पालघर कांड का भी किया जिक्र
आदित्य ठाकरे ने अपने बयान में पालघर साधु हत्याकांड का भी उल्लेख किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उस मामले के मुख्य आरोपी भाजपा से जुड़े थे. ठाकरे ने कहा कि आज देश में हिंदुओं की जो स्थिति है, उसके लिए भाजपा की नीतियां जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को उठाने वालों को राष्ट्रविरोधी या हिंदू विरोधी बताना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है.
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने रचा इतिहास
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट हाल ही में देश की सबसे चर्चित सीटों में रही. 3 अगस्त को घोषित नतीजों में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने राजनीतिक करियर का पहला चुनाव जीतते हुए भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,419 वोटों से हराया. प्रशांत किशोर को 63,203 वोट (करीब 49%) मिले, जबकि राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं. यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता था.
31 साल बाद टूटा BJP का गढ़
बांकीपुर सीट (पूर्व में पटना पश्चिम) पर 1995 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा था. भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे. उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया. इस चुनाव में सिर्फ 34.30 प्रतिशत मतदान हुआ, लेकिन इसके बावजूद प्रशांत किशोर ने भाजपा के 31 साल पुराने किले को ढहा दिया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं की नाराजगी और पारंपरिक वोट बैंक में सेंध के कारण भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा.
