सीजेपी के अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने कहा, "अगर पुलिस की तरफ से छात्रों को परेशान करने का सिलसिला जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही एक बड़े और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के जरिए इसका जवाब देगी. सरकार को छात्रों को निशाना बनाना और उन्हें परेशान करना बंद करना चाहिए."
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जताई चिंता
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम आदेश, विशेष रूप से निर्देश संख्या 4 पर गहरी चिंता व्यक्त की है. इस निर्देश के तहत सरकारों को मौजूदा एफआईआर के आधार पर जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है. दास का कहना है कि यह निर्देश केंद्र सरकार द्वारा 25 जुलाई 2026 को युवाओं को दिए गए उस ठोस आश्वासन के सीधा खिलाफ है, जिसमें सभी मामले वापस लेने और किसी भी प्रदर्शनकारी पर कार्रवाई न करने का वादा किया गया था.
कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल कर सरकार आंदोलनकारियों को कर सकती है परेशान : सौरव दाव
सीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि इसी सरकारी आश्वासन पर विश्वास करते हुए पार्टी ने अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस लिया था. अब उन्हें अंदेशा है कि केंद्र और राज्य सरकारें कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल आंदोलनकारियों को परेशान करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए कर सकती हैं.
"अदालत के आदेश की आड़ न ले सरकार"
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकारों को एफआईआर वापस लेने से नहीं रोकता.
"अदालत ने यह अनिवार्य नहीं किया है कि सरकारों को एफआईआर पर कार्रवाई करनी ही होगी. एफआईआर वापस लेने का अधिकार अभी भी पूरी तरह से कार्यपालिका (सरकार) के पास सुरक्षित है, जैसा कि बिहार और असम की सरकारों ने किया है। सरकार कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर अपने वादे से पीछे न हटे." - सौरव दास, सीजेपी प्रवक्ता
सौरव दास ने सरकारी वकीलों की भूमिका पर भी उठाया सवाल
सौरव दास ने अदालत में सरकारी वकीलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि सरकार और संगठन के बीच देर रात तक बातचीत चल रही थी, इसके बावजूद केंद्र के वकीलों ने कोर्ट में 25 जुलाई के समझौते की जानकारी नहीं दी और न ही आदेश का विरोध किया.
सरकार के सामने रखीं दो प्रमुख मांगें
- केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारें 25 जुलाई को युवाओं के साथ हुए समझौते के नियमों और शर्तों को तुरंत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखें, ताकि भविष्य में अदालत पूरी जानकारी के आधार पर आदेश जारी कर सके.
- प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को अविलंब वापस लिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी युवा पर भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो.
'डेडलाइन समाप्त, आंदोलन की चेतावनी'
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार को अपने वादे पूरे करने के लिए दी गई समय सीमा (डेडलाइन) खत्म हो रही है. यदि सरकार ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया, तो पार्टी के पास छात्रों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा.
"संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. यदि युवाओं को दिए गए भरोसे को तोड़ा गया, तो देश की सड़कें एक बार फिर भारत के युवाओं की आवाज बनेंगी." - सौरव दास
