मीडिया से बातचीत के दौरान दीपके के माता-पिता भावुक होते हुए बीते कठिन दिनों को याद किया. मां अनीता दीपके ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं. मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है. कभी-कभी मुझे डर भी लगता था क्योंकि उसे पीटा गया था. मुझे हमेशा चिंता रहती थी कि उसके साथ क्या होगा. उन्होंने उसे थप्पड़ मारा. मुझे बहुत बुरा लगा. मैं सो नहीं पाई. मैं सुबह तीन-चार बजे तक जागती रही. मैं कुछ खा भी नहीं पाई. हम दोनों की भूख-प्यास उड़ गई थी और नींद भी नहीं आ रही थी. 7 जून के बाद से घर में किसी भी काम में मन नहीं लग रहा है. उसने बहुत बढ़िया काम किया है. वह अभी बहुत छोटा है, फिर भी उसने इतनी कम उम्र में इतना बड़ा काम कर दिखाया है. मुझे उस पर बहुत गर्व है."
"मच्छरों में सोना पड़ा, लेकिन आज बड़ी जीत हुई"
दीपके की मां ने भावुक होकर बताया कि उनके बेटे ने कई तरह की तकलीफें सही हैं. उसे मच्छरों के बीच सोना पड़ा और वह टाइफाइड जैसी बीमारी से भी जूझा. पिछले आठ महीनों से वह लगातार तनाव में था और चैन से सो भी नहीं पा रहा था. लेकिन आज उसने इन तमाम मुश्किलों को मात देकर एक बड़ी जीत हासिल की है.
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