Rare liver transplant sets a precedent : दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने फिलीपींस के जुड़वां भाइयों केली और टायलर को दुर्लभ ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट के जरिए नई जिंदगी देकर चिकित्सा जगत में एक नई मिसाल कायम की है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दोनों बच्चों को जन्मजात ‘कोलेडोकल सिस्ट’ (Choledochal Cyst) बीमारी से ग्रसित थे, जिसने धीरे-धीरे उनके लिवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया और आखिरकार लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा.
जुड़वां होने के साथ एक जैसी गंभीर बीमारी
अस्पताल के ट्रांसप्लांट एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि जुड़वां बच्चों में एक साथ यही दुर्लभ बीमारी होना बेहद असामान्य है. यह बीमारी लगभग एक लाख बच्चों में किसी एक को होती है और इनमें भी केवल करीब 10 प्रतिशत मामलों में लिवर इतनी बुरी तरह प्रभावित होता है कि ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है.
मां और मामा बने जिंदगी के असली हीरो
जब बच्चों के माता-पिता इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे तो दोनों ने लिवर दान करने की इच्छा जताई. हालांकि, पिता चिकित्सकीय रूप से दान के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए. इसके बाद बच्चों की मां और उनके मामा ने आगे आकर अपने-अपने लिवर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा दान किया. डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने दोनों बच्चों का सफल ट्रांसप्लांट किया, जिससे उनकी जान बच गई.
अब सामान्य जीवन जी सकेंगे दोनों भाई
डॉ. गोयल ने बताया कि लिवर शरीर का ऐसा अंग है जो दोबारा विकसित होने की क्षमता रखता है. यही कारण है कि दानदाता और प्राप्तकर्ता दोनों का लिवर समय के साथ सामान्य आकार में लौट आता है. उन्होंने बताया कि सफल सर्जरी के बाद केली और टायलर पूरी तरह स्वस्थ हैं और अब सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकते हैं. इस दुर्लभ सफलता ने एक बार फिर भारत की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और अंग प्रत्यारोपण विशेषज्ञता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है.
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