देहरादून : उत्तराखंड में नामांकन पत्र वापस लेने की तिथि में केवल दो दिन शेष रहने के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों ने चुनावी मैदान में बतौर निर्दलीय ताल ठोंक रहे अपने बागी प्रत्याशियों को मनाने के लिये पूरा जोर लगा दिया है.
प्रदेश के दोनों बडे राजनीतिक दल 15 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आधा दर्जन से अधिक सीटों पर अपने नेताओं की बगावत की चुनौती से जूझ रहे हैं. बागियों के चुनावी गणित बिगाडने की आशंका से ग्रस्त दोनों पार्टियां उन्हें मैदान से हटाने और पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिये कडी मेहनत कर रही हैं.
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद ऐसे मामलों पर नजर रख रहे हैं और उन्होंने बागियों को मनाने के काम में लगे नेताओं की विफलता पर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की है. उत्तराखंड में पार्टी मामलों के प्रभारी श्याम जाजू ने तो बागी प्रत्याशियों के नाम वापसी की आखिरी तिथि एक फरवरी तक नामांकन वापस न लेने पर उनके खिलाफ कडी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने बगावत की समस्या से निपटने के लिये अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों को यहां भेजा है जो मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ बागी प्रत्याशियों को मनाने के प्रयास में लगे हैं. करीब आठ सीटों पर पार्टी के बागी प्रत्याशी खडे हो गये हैं जो अधिकृत उम्मीदवारों की जीत की डगर कठिन बनाने में जुटे हैं.
