10 साल बाद फिर गूंजा ऊना कांड: राहुल गांधी ने कोड़े मारने का मुद्दा उठाकर BJP को घेरा

Una Flogging Incident: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 10 साल पुराने ऊना कांड का मुद्दा उठाया है. उन्होंने इसको लेकर बीजेपी सरकार पर हमला भी बोला. राहुल ने आरोप लगाया कि बीजेपी के शासन में गुजरात में दलित, आदिवासियों के खिलाफ नफरत, भेदभाव और अत्याचार बढ़ता जा रहा है.

Una Flogging Incident: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी गांधी ने ऊना में कोड़े मारने की 2016 की घटना के पीड़ितों के प्रति एकजुटता जताई. उन्होंने संकल्प लिया कि वह न्याय मिलने तक उनकी आवाज उठाते रहेंगे.

गुजरात के दलित एवं आदिवासी समुदायों के साथ बातचीत का वीडियो किया शेयर

राहुल गांधी ने गुजरात के दलित एवं आदिवासी समुदायों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया. जिसमें ऊना कांड के पीड़ित भी शामिल थे. वीडियो साझा करते हुए राहुल ने लिखा, यह मुलाकात बेहद पीड़ादायक और चिंतनशील रही.

क्या है ऊना कांड?

गुजरात में कोड़े मारने की घटना 11 जुलाई 2016 को गिर सोमनाथ जिले के ऊना कस्बे के निकट मोटा समधियाला गांव में हुई थी. जब चार दलित युवक अपने पारंपरिक पेशे के तहत उस गाय की खाल उतार रहे थे, जिसकी कुछ समय पहले किसी दूसरे गांव में मौत हो गई थी. गोरक्षक बताने वाले आरोपियों ने इन युवकों को कोड़े मारे. इसके बाद उन्हें कथित तौर पर अवैध रूप से हवालात में डाल दिया गया. पुलिसकर्मियों ने भी उनकी पिटाई की.

ऊना कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था : राहुल गांधी

राहुल गांधी ने पोस्ट में लिखा- करीब 10 साल पहले ऊना कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था. कुछ दलित युवाओं को सरेआम निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया. उस समय मैं उनके परिवारों के साथ खड़ा था. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक दशक बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला, न उनके घाव भरे हैं, उल्टा हालात और बदतर हो गए हैं. आज जब मैंने प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनीं तो यह स्पष्ट हुआ कि हालात सुधरने के बजाय और भी भयावह हो गए हैं. एक व्यक्ति को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके शरीर में 19 फ्रैक्चर हो गए. एक अन्य व्यक्ति का भाई सिर्फ एक सनक में जिंदा जला दिया गया. ये घटनाएं केवल अपराध नहीं बल्कि भय और अन्याय से भरे माहौल की सच्चाई हैं.

आवाज उठाने वालों को दबा दिया जाता है: राहुल गांधी

गांधी ने कहा, सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें दबा दिया जाता है. कभी धमकियों से, तो कभी हिंसा से और कई बार हत्या करके. गुजरात में बीजेपी सरकार के तहत दलितों और आदिवासी समुदायों के खिलाफ नफरत, भेदभाव और अत्याचार का वातावरण लगातार गहराता जा रहा है. ऊना के पीड़ित आज भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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