आरएसएस पर की गयी टिप्पणी के मामले में मुकदमा लड़ने के लिए तैयार हैं राहुल गांधी

नयी दिल्ली : चुनावी सभा में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ) पर की गयी टिप्पणी के मामले में कांग्रेस पार्टी और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब आक्रामक मोड में आ गये हैं. राहुल ने कहा कि वो अपने दिये गये बयान के एक – एक शब्द पर अभी भी कायम है. कांग्रेस पार्टी खुलकर […]

नयी दिल्ली : चुनावी सभा में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ) पर की गयी टिप्पणी के मामले में कांग्रेस पार्टी और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब आक्रामक मोड में आ गये हैं. राहुल ने कहा कि वो अपने दिये गये बयान के एक – एक शब्द पर अभी भी कायम है. कांग्रेस पार्टी खुलकर राहुल गांधी का समर्थन कर रही है. इस मामले में लगे आरोप के बाद राहुल गांधी भी मानहानि के मुकदमे की तैयारी कर रहे हैं. राहुल गांधी महाराष्ट्र की अदालत के समक्ष मुकदमे का सामना करने को तैयार हैं. अदालत ने उन्हें इस मामले में आरोपी के तौर पर तलब किया था.

राहुल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ के समक्ष कहा, ‘‘मैं अपने एक-एक शब्द पर कायम हूं. मैं अपने शब्द कभी वापस नहीं लूंगा. मैं कल भी इसपर कायम था. मैं आज भी इसपर कायम हूं और भविष्य में भी इसपर कायम रहूंगा. मैं मुकदमे का सामना करने को तैयार हूं.’ कांग्रेस उपाध्यक्ष ने 2015 में एक चुनावी रैली में बयान दिया था. वह महाराष्ट्र के भिवंडी की एक अदालत में मुकदमे का सामना करेंगे, जहां उनके खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया गया है.
जब मामला पीठ के समक्ष आया तो आरएसएस के पदाधिकारी के वकील ने कहा कि उन्हें निर्देश मिला है कि मामले को समाप्त किया जा सकता है अगर राहुल एक अन्य स्पष्टीकरण में बयान दे दें कि उनकी कभी यह कहने की मंशा नहीं थी कि हत्या के पीछे आरएसएस का हाथ था. हालांकि, सिब्बल ने दलील दी कि शीर्ष अदालत इस बात को रिकॉर्ड में ले ले कि राहुल मुकदमे का सामना करना चाहते हैं क्योंकि वह अपने एक-एक शब्द पर कायम हैं. पीठ ने इसे खारिज कर दिया.
अदालत ने राहुल को मामले में भिवंडी की अदालत के समक्ष निजी पेशी से छूट देने से इंकार कर दिया.आरएसएस पदाधिकारी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता यू आर ललित ने कहा कि राहुल से इस तरह के बयान की आवश्यकता थी क्योंकि पिछले 60 वर्षों में जहां भी चुनाव हुआ, कांग्रेस ने राष्ट्रपिता की हत्या के लिए आरएसएस पर दोषारोपण करने का प्रयास किया.
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी और जहां भी चुनाव होता है, आरएसएस की छवि धूमिल की जाती है.’ ललित ने कहा कि अगर राहुल अपनी सद्भावना का इजहार करने को इच्छुक नहीं हैं कि उनकी हत्या के लिए आरएसएस पर आरोप लगाने की मंशा नहीं थी, तो वह चुनावी रैली में उनके द्वारा इस्तेमाल वाक्यों का क्रम दिखा सकते हैं कि आरएसएस उनका निशाना था. हालांकि, इस दलील का सिब्बल ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष ने जो बयान दिया वह राजनैतिक भाषण की तरह है और शीर्ष अदालत उसे स्वीकार नहीं कर सकती.
जब पीठ राहुल की दलील पर विचार करने को तैयार नहीं थी तो सिब्बल ने कांग्रेस नेता द्वारा बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील को वापस लेने को तरजीह दी. बंबई उच्च न्यायालय ने मामले को निरस्त करने और निचली अदालत द्वारा राहुल के खिलाफ जारी सम्मन को निरस्त करने से मना कर दिया था. पीठ ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली और राहुल द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया.
पीठ ने यह भी कहा कि निचली अदालत शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना मामले में आगे बढेगी. गत 24 अगस्त को राहुल ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के लिए एक संस्था के तौर पर आरएसएस पर कभी दोषारोपण नहीं किया था, बल्कि उससे जुड़े लोगों का हत्या के पीछे हाथ था.

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