नागरिकता कानून : हिंसक प्रदर्शन की चपेट में आने से बाल-बाल बचे स्कूली बच्चे

नयी दिल्ली : उत्तर पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में मंगलवार को संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद स्कूली बच्चे उसकी चपेट में आने से बाल-बाल बचे. प्रदर्शन स्थल के पास ही एक स्कूल में बच्चे पढ़ रहे थे. हिंसा फैलने के बाद यहां अफरा-तफरी मच गई और चिंतित […]

नयी दिल्ली : उत्तर पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में मंगलवार को संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद स्कूली बच्चे उसकी चपेट में आने से बाल-बाल बचे.

प्रदर्शन स्थल के पास ही एक स्कूल में बच्चे पढ़ रहे थे. हिंसा फैलने के बाद यहां अफरा-तफरी मच गई और चिंतित अभिभावकों ने स्कूल पहुंचना शुरू कर दिया. स्कूल प्रशासन ने बच्चों और उनके अभिभावाकों को पीछे के दरवाजे से सुरक्षित निकाल दिया.

सीलमपुर इलाके में मंगलवार को संशोधित नागरिकता कानून और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला जा रहा था. जब यह मार्च सीलमपुर टी प्वाइंट के पास पहुंचा तो हिंसक हो गया.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. यह पूरा बवाल रोड नं 66 पर हुआ. इसी रोड पर जाफराबाद थाना है. इसी के बराबर में नगर निगम का प्राथमिक स्कूल है.

दोपहर करीब ढाई बजे प्रदर्शन के हिंसक होने की खबर जैसे ही इलाके में फैली स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के घबराए अभिभावकों ने स्कूल का रुख करना शुरू कर दिया. स्कूल के एक शिक्षक ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध पर बताया कि विद्यालय में करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन आज बंद का आह्वान किया गया था, जिस वजह से स्कूल में सिर्फ 21 बच्चे ही आए थे. यह पूछे जाने पर कि बंद का आह्वान किसने किया था, उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया.

हालांकि इलाके में बंद दुकानों के शटरों पर ऐसे पोस्टर लगे देखे गए जिन पर लिखा था, एनआरसी और सीएबी के विरोध में आज दुकानें बंद रहेंगी. शिक्षक ने बताया कि दोपहर करीब तीन-साढ़े तीन बजे स्कूल के सामने ही काफी पथराव हो रहा था और पुलिस आंसू के गैस के गोले छोड़ रही थी.

हमने स्कूल का मुख्य द्वार बंद कर दिया था. शिक्षक ने बताया कि हम मुख्य द्वार बंद करके स्कूल में ही रूके हुए थे. इस बीच घबराए अभिभावक पीछे के दरवाजे से अपने बच्चों को लेने के लिए स्कूल आने लगे.

शिक्षक ने बताया कि हमने बच्चों को उनके माता-पिता के साथ पीछे के दरवाजे से घर भेज दिया, लेकिन हम स्कूल में ही रूक गए, क्योंकि हमारी ड्यूटी शाम तक की थी.

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