हरियाणा विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती आज जारी है. ताजा रुझानों के अनुसार 90 सीटों वाली हरियाणा में बीजेपी सबसे आगे हैं मगर त्रिशंकु विधानसभा की उम्मीद है. वहां बीजेपी सबसे आगे फिर कांग्रेस और फिर नई नवेली पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) का नंबर आ रहा है. जननायक जनता पार्टी के गठन को अभी एक वर्ष भी नहीं हुए मगर, पार्टी के प्रदर्शन ने राजनीतिक विश्लेषकों को चकित कर दिया.
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला जननायक जनता पार्टी (JJP) के अध्यक्ष और संस्थापक हैं. वह 16वीं लोकसभा में हिसार निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने जा चुके हैं. उनका जन्म 3 अप्रैल 1988 को भारतीय राजनेता और पूर्व सांसद अजय चौटाला के घर हुआ. दुष्यंत चौटाला देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के परपोते हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में चौटाला ने हरियाणा जनहित कांग्रेस (भजनलाल) के कुलदीप बिश्नोई पर जीत हासिल की थी. उनका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड’ में सबसे कम उम्र(26 साल) के सांसद के रूप में दर्ज है. इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) पार्टी से निष्कासित होने के बाद उन्होंने 9 दिसंबर, 2018 को अपने भाई के साथ एक नई पार्टी जननायक जनता पार्टी का गठन किया था.
हरियाणा के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है. लेकिन सभी तालों की चाबी दुष्यंत चौटाला के पास है. वो किंग मेकर की भूमिका में आ गई है. सवाल ये है कि सिर्फ 319 दिन पुरानी जन नायक जनता पार्टी कैसे किंग मेकर की भूमिका में उभर गई. वो इनेलो से भी कैसे आगे हो गई? जेजेपी की घोषणा 9 दिसंबर 2018 को जींद के पांडु-पिंडारा हुई थी.
दरअसल, इस पार्टी को हरियाणा के दो लड़कों ने खड़ा किया है. जीत किसी की भी हो लेकिन इस नई पार्टी को मिले समर्थन ने विश्लेषकों को तारीफ करने पर मजबूर कर दिया है. इसीलिए वो किंग मेकर बन गए हैं. शुरुआती रुझानों को देखकर जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के दुष्यंत चौटाला ने त्रिशंकु विधानसभा की उम्मीद जताई है. दुष्यंत ने कहा, ‘न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस 40 सीटों को पार कर पाएगी. सत्ता की चाबी जेजेपी के पास रहेगी. हमारी सीधी लड़ाई 26-27 सीटों पर है.
बता दें कि हरियाणा को जाटलैंड कहा जाता है. इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से बाहर होने के बाद दुष्यंत और उनके भाई दिग्विजय चौटाला ने पूरे हरियाणा का भ्रमण कर अपनी पार्टी जेजेपी का गठन किया. विधानसभा चुनाव में जाटलैंड का पूरी समर्थन जेजेपी को मिलता दिख रहा है. जाटलैंड में भतीजों के प्रति जनता के रुझान ने बता दिया है कि चाचा (अभय चौटाला) ने उन्हें पार्टी (इनेलो) से बाहर निकालकर गलती की है.
दोनों की युवा मतदाताओं में अच्छी पकड़ है. जिस तरह से अखिलेश यादव यूपी में खुद को नई पीढ़ी के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं उसी तरह हरियाणा में दुष्यंत और उनके भाई दिग्विजय चौटाला भी चल रहे हैं.दरअसल, युवा मतदाताओं के बीच दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला काफी लोकप्रिय हैं. दोनों सहजता और शालीनता के लिए जाने जाते हैं. दुष्यंत चौटाला के समर्थक उन्हें पार्टी की ओर से सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे थे लेकिन ये बात इनेलो संभाल रहे अभय चौटाला को रास नहीं आई.
नतीजा ये हुआ कि दुष्यंत और दिग्विजय को नंवबर 2018 में इनेलो से निकाल दिया गया था. इसके बाद दोनों भाईयों ने मिलकर जनता का मूड जाना. हरियाणा का भ्रमण किया और दिसंबर में जन नायक जनता पार्टी (जेजेपी) खड़ी कर दी. आज जब विधानसभा चुनाव की मतगणना हो रही है तो जेजेपी करीब करीब किंगमेकर की भूमिका में दिखायी दे रही है .
दुष्यंत चौटाला की नई नवेली पार्टी छुपी रुस्तम साबित हो रही है. जजपा ने विधानसभा चुनाव जीतने के लिए चल रही जद्दोजहद में बड़े दलों के पसीने छुड़ा दिए हैं. पार्टी चाहे सीटें जितनी भी जीते, मगर बड़ा वोट बैंक हथियाते हुए दिख रही है.
9 दिसंबर 2018 को अस्तित्व में आई जेजेपा ने एक साल के भीतर ही प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन को खासा मजबूत किया है. बीते दस महीने में पार्टी तीसरा चुनाव लड़ रही है. पहले जींद उपचुनाव लड़ा, उसके बाद लोकसभा चुनाव और अब विधानसभा चुनाव में पूरी 90 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि भविष्य में हरियाणा की सियासत में जेजेपी की क्या हैसियत होगी.
