दो महिला अधिकारी घाटी में निभा रही हैं अहम जिम्मेदारी, बोलीं- चुनौतियों का सामना करना अच्छा लगता है

श्रीनगर: घाटी में व्याप्ता तनाव के बीच दो महिला अफसर ऐसी हैं जिन्हें काफी अहम जिम्मेदारी दी गई है. जबसे जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है महिला ऑफिसर डॉ. सैयद असगर और पीके नित्या दो अलग-अलग जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं. बता दें कि घाटी में तनाव के बीच […]

श्रीनगर: घाटी में व्याप्ता तनाव के बीच दो महिला अफसर ऐसी हैं जिन्हें काफी अहम जिम्मेदारी दी गई है. जबसे जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है महिला ऑफिसर डॉ. सैयद असगर और पीके नित्या दो अलग-अलग जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं. बता दें कि घाटी में तनाव के बीच केवल इन्हीं दो महिला अधिकारियों को यहां तैनात किया गया है.

घाटी में सूचना अधिकारी हैं डॉ. सैयद असगर

केंद्र सरकार ने डॉ. सैयद सेहरिश असगर को घाटी में सूचना विभाग का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है जो जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ सहयोग कर रही हैं. इनका काम घाटी में सूचना तंत्र की निगरानी करना और केंद्र की घाटी के साथ लगातार संपर्क को बनाए रखना है. इसके अलावा असगर वहां के स्थानीय लोगों को देश के दूसरे हिस्सों में रह रहे परिजनों के साथ संपर्क स्थापित करने में मदद करना है.

साथ ही डॉ. सैयद घाटी के लोगों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी देती हैं. आपको बता दें पिछले आठ दिनों से सैयद स्थानीय लोगों की संपर्क सबंधित शिकायतों का समाधान भी कर रही हैं.

एक साल के बच्चे की मां डॉ. सैयद असगर एमबीबीएस डॉक्टर भी हैं. हालांकि उन्होंने अपनी प्रैक्टिस छोड़कर प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर के तौर पर मेरा काम मरीजों का इलाज करना था लेकिन आईएएस ऑफिसर होने के नाते घाटी में कई चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि यहां लोगों के साथ एकबार में सख्ती भी दिखानी होती है और भावनात्मक सपोर्ट भी. उन्होंने कहा कि मैं काफी गौरवान्वित महसूस करूंगी अगर महिलाओं से समाज में बदलाव आता है.

चुनौतियां पसंद हैं आईपीएस पीके नित्या को

दूसरी महिला आईपीएस ऑफिसर हैं पीके नित्या. साल2016 बैच की आईपीएस ऑफिसर नित्या को राममुंशी वाघ से लेकर हरवन डागची गांव के बीच सुरक्षा व्यवस्था की कमान सौंपी गई है. इसके बीच 40 किलोमिटर के दायरे में ना केवल डल झील और गर्वनर आवास आता बल्कि कई अन्य वीवीआईपी के आवास भी इसके दायरे में आते हैं.

वहीं 28 साल की नित्या छत्तीसगढ़ से आती हैं. नित्या पहले किसी सीमेंट कंपनी में नौकरी करती थीं और साल 2016 में पुलिस अधिकारी बनीं. उन्होंने बताया कि एक कॉरपोरेट जॉब के मुकाबले यहां कहीं ज्यादा चुनौतियां और मुश्किल हैं. लेकिन मुझे चुनौतियों का सामना करना अच्छा लगता है. नित्या बताती हैं कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा के अलावा मुझे वीवीआपी लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी पड़ती है. इनका कहना है कि मैं छत्तीसगढ़ के दुर्ग से आती हूं जहां अपेक्षाकृत शांति है.

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