बस कुछ दिन का इंताजर, फिर राज्यसभा में भी पूर्ण बहुमत पा लेगा NDA!

नयी दिल्लीः हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की. अब भाजपा नीत एनडीए का अगला लक्ष्य राज्यसभा में बहुमत हासिल करना है. उम्मीद है कि बहुत जल्द एनडीए का ये सपना भी पूरा हो जाएगा. चार टीडीपी (तेलुगू देसम पार्टी) एक आईएनएलडी (इंडियन नेशनल लोकदल) […]

नयी दिल्लीः हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की. अब भाजपा नीत एनडीए का अगला लक्ष्य राज्यसभा में बहुमत हासिल करना है. उम्मीद है कि बहुत जल्द एनडीए का ये सपना भी पूरा हो जाएगा. चार टीडीपी (तेलुगू देसम पार्टी) एक आईएनएलडी (इंडियन नेशनल लोकदल) के राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने और गठबंधन के चार नए सांसदों के कारण एनडीए पांच जुलाई से राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंच जाएगा. दोनों सदनों में बहुमत के साथ ही सरकार के लिए महत्वपूर्ण बिलों को पास कराना बहुत आसान हो जाएगा. किसी भी महत्वपूर्ण बिल को पास कराने के लिए बहुमत के बाद सरकार को अन्य दलों के सहयोग की जरूरत नहीं होगी.

राज्यसभा की छह सीटों पर पांच जुलाई को चुनाव है. इनमें से एक पर भाजपा की सहयोगी लोजपा प्रमुख मुखिया राम विलास पासवान निर्विरोध चुने जा चुके हैं. इसके अलावा गुजरात की दो सीटें भाजपा के खाते में जाती दिख रही हैं. ओडिशा में भी तीन सीटों पर चुनाव हैं, इनमें से एक भाजपा और दो बीजेडी के हिस्से जा सकती हैं.

इसके बाद 18 तारीख को तमिलनाडु की छह सीटों पर चुनाव होगा. इन सीटों पर सांसदों का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है. फिलहाल एआईएडीएमके के पास इनमें से चार सीटें हैं, जबकि डीएमके और सीपीआई के पास एक-एक सीट है. इस बार डीएमके के खाते में तीन और एआईएडीएमके के खाते में तीन सीटें जाने की उम्मीद है. हालांकि तमिलनाडु की सीटें राज्यसभा के गणित पर कोई बड़ा असर नहीं डालेंगी.

रविवार तक के आंकड़ों के मुताबिक 235 सदस्यों वाले उच्च सदन में राजग के 111 राज्यसभा सांसद हैं. वर्तमान में 10 सीटें खाली हैं, जिनमें से चार सांसद 5 जुलाई तक एनडीए के चुनकर आने की संभावना है. इसके साथ ही यह आंकड़ा 115 हो जाएगा. कुल 241 सदस्यों की संख्या में 115 सांसदों का आंकड़े का अर्थ है कि एनडीए के पास बहुमत से महज छह सांसद कम रहेंगे. यदि राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हो जाते हैं तो फिर एनडीए को अपने दम पर 123 सांसदों की जरूरत होगी.
हालांकि उच्च सदन में किसी विधेयक को पारित कराने में एनडीए को समस्या नहीं आएगी यदि टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआरसीपी जैसी गैर-यूपीए पार्टियां उसे समर्थन करती हैं.

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