नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों पर सुनवाई पूरी की.केंद्र का कहना था कि पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता गैरकानूनी तरीके से प्राप्त किये गये विशेषाधिकार वाले दस्तावेजों को आधार नहीं बना सकते. प्रशांत भूषण ने न्यायालय से कहा राफेल सौदे में सरकार और सरकार के बीच कोई करार नहीं है क्योंकि इसमें फ्रांस ने कोई संप्रभु गारंटी नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट ने भूषण से कहा कि हम केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति पर फैसला करने के बाद ही मामले के तथ्यों पर विचार करेंगे.
कोर्ट में भूषण ने कहा कि राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है जिसमें कैग की रिपोर्ट में कीमतों के विवरण को संपादित किया गया हो. सुनवाई के दौरान एजी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कोई भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज प्रकाशित नहीं कर सकता. राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का हवाला दिया.
यह पीठ राफेल विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. ये पुनर्विचार याचिका पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर की है.
