हिंदी के इस्तेमाल को लेकर विवाद गहराया, कांग्रेस ने दी सावधानी बरतने की सलाह
नयी दिल्लीः हिंदी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. गृह मंत्रालय ने अपने विभागों को हिंदी में काम करने का निर्देश क्या जारी कर दिया कई राज्यों के में हंगामा खड़ा हो गया है. हिंदी के भाषा ने अब राजनीतिक रूप धारण कर लिया है. उधर कांग्रेस ने आज सरकार को सोशल मीडिया में […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नयी दिल्लीः हिंदी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. गृह मंत्रालय ने अपने विभागों को हिंदी में काम करने का निर्देश क्या जारी कर दिया कई राज्यों के में हंगामा खड़ा हो गया है. हिंदी के भाषा ने अब राजनीतिक रूप धारण कर लिया है. उधर कांग्रेस ने आज सरकार को सोशल मीडिया में हिन्दी भाषा को बढावा देने के उसके निर्णय में सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि इसके चलते गैर हिन्दभाषी राज्यों खासकर तमिलनाडु में प्रतिक्रिया हुई है.
हिंदी के इस्तेमाल के खिलाफ सियासी आवाज उठने लगे हैं. हिंदी के इस्तेमाल के विरोध में आवाजें उठ रही हैउत्तर का राज्य जम्मू कश्मीर हो या फिर दक्षिण का राज्य तमिलनाडु. कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर फैसले पर फिर से सोचने को कहा है.
जयललिता ने लिखा, ‘आपकी सरकार के ज्ञापन से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे हिंदी अनिवार्य है और अंग्रेजी वैकल्पिक.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘आपको पता ही है कि यह बेहद ही संवेदनशील मुद्दा है जो कई बार तमिलनाडु के लोगों की नाराजगी का कारण भी बना है. तमिलनाडु की जनता अपनी भाषा की विरासत को लेकर बहुत गर्व महसूस करते हैं.’ जया ने लिखा कि सोशल मीडिया में अंग्रेजी भाषा ही यूज की जाए.
वहीं, पीएमके अध्यक्ष रामदौस ने भी हिंदी के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है.उमर अब्दुल्ला भी हिंदी के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं हैं. सरकार इस पूरे फैसले पर बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है. शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने आज कहा कि किसी पर हिन्दी के लिए जोर नहीं डाला जा रहा है तथा हिन्दी थोपने को लेकर ‘‘दुष्प्रचार’’ किया जा रहा है.
संसदीय कार्य मंत्री नायडू ने कहा, ‘‘एक दुष्प्रचार चल रहा है. कोई भी किसी पर हिन्दी के लिए जोर नहीं डाल रहा..’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं अधिक से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं को महत्व देकर लोकप्रिय बना रहा हूं..यह इस सरकार की नीति है. किसी भाषा को थोपने का सवाल ही नहीं है. इस बारे में कोई भी आशंका नहीं होनी चाहिए.’’ गृह मंत्रालय के परिपत्रों का विरोध हो रहा है विशेषकर तमिलनाडु में.तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों ने आशंका जतायी है कि इसके जरिये गैर हिन्दी वर्गों पर हिन्दी को थोपा जा रहा है.
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता चिदम्बरम ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में संवादददाताओं से कहा, ‘‘गैर हिन्दी भाषी राज्यों खासकर तमिलनाडु में प्रतिक्रिया हुई है. सरकार को सावधानी के साथ आगे बढना होगा.’’ भाजपा ने सरकारी कामकाज में हिन्दी को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की पहल का बचाव करने का प्रयास करते हुए कहा है कि हिन्दी को प्राथमिकता और प्रोत्साहन देने का यह अर्थ कतई नहीं है कि अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा को अलग थलग किया जा रहा है. हिन्दी भाषा देश की आत्मा और क्षेत्रीय भाषाओं एवं संस्कृति का मिश्रण है.
सोशल मीडिया में हिन्दी को बढावा देने से संबंधित गृह मंत्रालय के परिपत्र से विवाद उत्पन्न हुआ है और द्रमुक ने सरकार पर गैर हिन्दी भाषी वर्ग पर हिन्दी थोपने का आरोप लगाया है.गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हालांकि इस विवाद को तवज्जो न देने का प्रयास करते हुए कल कहा था कि केंद्र सरकार देश की सभी भाषाओं को बढावा देगी.