यूपी के राज्यपाल बीएल जोशी का इस्तीफा, कई और के भी जाने के आसार

नयी दिल्‍ली : नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से यूपीए शासन में नियुक्त कुछ राज्यपालों को पद से हटने का बनाये गये दबाव के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया. गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंजूरी के लिए उसे प्रधानमंत्री कार्यालय भेज […]

नयी दिल्‍ली : नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से यूपीए शासन में नियुक्त कुछ राज्यपालों को पद से हटने का बनाये गये दबाव के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया. गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंजूरी के लिए उसे प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है. इसके अलावा जिन राज्यपालों पर पद छोड़ने का दबाव बन रहा है, उनमें केरल की शीला दीक्षित सहित चार अन्य शामिल हैं. इस बीच नयी सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जैसी इकाइयों में सदस्यों के रूप में ह्यराजनीतिक नियुक्तियोंह्ण को भी हटाने की दिशा में सक्रिय है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. इस बीच कांग्रेस और माकपा ने सरकार के इस कदम को असंवैधानिक बताया है, लेकिन भाजपा का मानना है कि इसमें कुछ गलत नहीं है.

* गृह सचिव ने किया था फोन

समझा जाता है कि केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने ऐसे राज्यपालों (करीब छह से सात) को फोन करके नयी सरकार का यह संदेश उन तक पहुंचा दिया था कि वे अपने पद से हट जाएं. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गयी है. बताया जाता है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कथित तौर पर टिप्पणी की है कि ह्ययदि वह उनकी (राज्यपालों) की जगह होते तो पद से हट गये होते.

* नेहरू-गांधी परिवार के रहे करीबी

यूपी के 24वें राज्यपाल के रूप में 28 जुलाई 2009 को शपथ लेने वाले बीएल जोशी हमेशा ही विवादों से दूर रहे. उनका कार्यकाल कुछ महीने पहले ही पूरा हो गया था. उन्हें एक और कार्यकाल के लिए फिर से शपथ दिलायी गयी थी. नेहरू-गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले 78 वर्षीय जोशी ने बेहद शालीनता के साथ अपनी बात कही, सुझाव दिये. राजस्थान के नागौर जिले में जन्मे और भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े रहे जोशी दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर भी रह चुके हैं. जोशी पाकिस्तान एवं ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग व अमेरिका में भारतीय दूतावास से भी जुड़े रहे. बतौर राज्यपाल जोशी का किसी दल से कोई राजनीतिक टकराव नहीं हुआ.

* इनसे भी कहा गया हटने को !

माना जा रहा है कि राज्यपालों को हटनेके लिए कहा गया है उनमें केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित ,पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन, नगालैंड के अश्विनी कुमार, गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल, महाराष्ट्र के के शंकरनारायणन हैं. इसके अलावा राजस्थान की राज्यपाल मार्गेट आल्वा, कर्नाटक के एचआर भारद्वाज, असम के जेबी पटनायक के नाम की भी चर्चा है. भारद्वाज का कार्यकाल इसी माह और आल्वा का अगस्त माह में समाप्त हो रहा है.

* विपक्ष ने कहा -तानाशाही, भाजपा बोली-सामान्य बात

– कांग्रेस: कांग्रेस गुलाम नबी आजाद ने सरकार को मई 2010 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की याद दिलायी और कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र को ह्यमनमाने ढंगह्ण से राज्यपालों को हटाने का अधिकार नहीं है.

– माकपा: माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि राज्यपालों को महज इसलिए हटाया जाना कि वे पिछली सरकार द्वारा नियुक्त किये गये थे, उचित नहीं है.

– भाजपा: भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि राज्यपालों को खुद ही इस्तीफे दे देने चाहिए, क्योंकि उनकी नियुक्ति मैरिट के आधार पर नहीं हुई थी.

– सपा: सपा नेता नरेश अग्रवाल ने इस्तीफे को प्रजातंत्र के लिये घातक बताते हुए कहा कि यह देश के भगवाकरण की शुरुआत है और विपक्षी दलों की सरकारों के खिलाफ साजिश का भी हिस्सा है.

* यूपीए भी पीछे नहीं

2004 में सत्ता में आने के बाद यूपीए सरकार ने वाजपेयी सरकार ओर से नियुक्त यूपी के राज्यपाल विष्णुकांत त्रिपाठी, गुजरात के गर्वनर कैलाशपति मिश्रा, हरियाणा के बाबू परमानंद और गोवा के गर्वनर केदारनाथ साहनी को हटा दिया था.

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