नयी दिल्ली: लोकपाल नियुक्त करने की तरफ पहला कदम उठाते हुए सरकार ने नियमों में संशोधन कर खोज समिति को ज्यादा सशक्त करने का निर्णय किया है. समिति को भ्रष्टाचार निरोधक निकाय के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति की अनुशंसा करने का अधिकार दिया गया है.
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग खोज समिति के नियमों में संशोधन कर रही है जिसे जल्द ही अधिसूचित कर दिया जाएगा.वर्तमान नियमों के मुताबिक आठ सदस्यीय खोज समिति को चयन समिति के विचारार्थ लोगों का एक पैनल बनाने का काम दिया गया है. चयन समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे जो लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्यों को नियुक्त करेंगे.
नियमों के मुताबिक इन लोगों को डीओपीटी की तरफ से उपलब्ध कराए पैनल में से चुना जाना है.सूत्रों ने कहा कि बहरहाल सरकार खोज समिति को सशक्त करेगी ताकि चयन समिति के विचारार्थ डीओपीटी की सूची से बाहर के लोगों को शामिल किया जा सके. उन्होंने कहा कि खोज समिति के संविधान में कुछ और बदलाव हो सकते हैं.
इसके अलावा डीओपीटी ने कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर लोकपाल के अधीन सरकारी कर्मचारियों को संपत्ति कर दायर करने के नियमों की समीक्षा करने को कहा है. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम के मुताबिक हर नौकरशाह अपनी संपत्तियों एवं जवाबदेही की घोषणा करेगा.
सूत्रों ने कहा कि किसी सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह के रिटर्न दाखिल करने के फॉर्म का प्रारुप तैयार कर लिया गया है और इस संबंध में नियम कानून मंत्रालय के पास भेज दिया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए लोकपाल अधिनियम महत्वपूर्ण है.लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम के तहत नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन किया जाना है.
नरेन्द्र मोदी सरकार के रोडमैप का वर्णन करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को संसद के संयुक्त संबोधन में कहा कि नई सरकार ‘‘स्वच्छ एवं प्रभावी प्रशासन देने को प्रतिबद्ध है जो काम करे. भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए लोकपाल महत्वपूर्ण है और मेरी सरकार अधिनियम के मुताबिक नियमों को बनाने का प्रयास करेगी.’’ मुखर्जी ने इस वर्ष एक जनवरी को लोकपाल कानून को मंजूरी दी थी.
पिछली संप्रग सरकार लोकपाल की नियुक्ति को लेकर बहुत आगे नहीं बढ सकी थी क्योंकि तब भाजपा ने भ्रष्टाचार निरोधक निकाय की चयन प्रक्रिया को लेकर आपत्ति उठाई थी.राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने केंद्र में उनकी पार्टी के सरकार में आने से पहले लोकपाल में मुख्य नियुक्तियों को लेकर संप्रग सरकार द्वारा अपनाई गई ‘‘काफी अनुपयुक्त’’ प्रक्रिया पर कडी आपत्ति दर्ज कराई थी.
जेटली ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दो बार पत्र लिखकर आरोप लगाए थे कि डीओपीटी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया लोकपाल अधिनियम का उल्लंघन है और इसे कांग्रेस के वफादारों से भरने का प्रयास है.संप्रग सरकार ने इस वर्ष फरवरी में जल्दबाजी में आठ सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था जिसमें न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) के. टी. थॉमस (अध्यक्ष) एवं सात अन्य सदस्य थे.
मोदी के नेतृत्व वाली चयन समिति में सदस्य के रुप में लोकसभा अध्यक्ष, निचले सदन में विपक्ष के नेता, भारत के प्रधान न्यायाधीश या उनकी तरफ से मनोनीत उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश, राष्ट्रपति या किसी अन्य सदस्य द्वारा नामित एक प्रमुख कानूनविद होंगे.
निचले सदन में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन ने चूंकि विपक्ष के नेता के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं किया है इसलिए लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति में कुछ और वक्त लग सकता है.
