Defense: भविष्य के युद्ध की रणनीति तैयार करेगी भारतीय सेना

तीनों सेना के वरिष्ठ अधिकारी 'बहु-क्षेत्रीय अभियान: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटने की अनिवार्यता' विषय पर दो दिवसीय 'रण संवाद' में मंथन करेंगे. 'रण संवाद' का आयोजन 9-10 अप्रैल को वायु सेना प्रशिक्षण कमान, बेंगलुरु में आयोजित होगा. इस बार युद्ध के उभरते तरीकों पर मंथन होगा. कार्यक्रम में थल, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष अन्य क्षेत्रों सहित बहुआयामी संघर्ष के लिए तैयार रहने की रूपरेखा बनाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा.

Defense: समय के साथ युद्ध का तरीका बदल रहा है. अब परंपरागत युद्ध की बजाय युद्ध में तकनीक का प्रयोग बढ़ा है. रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान ड्रोन और तकनीक के असर का अध्ययन भारतीय सेना कर रही है. तीनों सेना के वरिष्ठ अधिकारी ‘बहु-क्षेत्रीय अभियान: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटने की अनिवार्यता’ विषय पर दो दिवसीय ‘रण संवाद’में मंथन करेंगे. ‘रण संवाद’ का आयोजन 9-10 अप्रैल को वायु सेना प्रशिक्षण कमान, बेंगलुरु में आयोजित होगा. इस बार युद्ध के उभरते तरीकों पर मंथन होगा. कार्यक्रम में थल, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष अन्य क्षेत्रों सहित बहुआयामी संघर्ष के लिए तैयार रहने की रूपरेखा बनाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा.

दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान बहुआयामी अभियानों के विकास, आधुनिक युद्धक्षेत्रों को आकार देने वाले वैश्विक रुझानों, राष्ट्रीय संसाधनों का लाभ उठाने वाले राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण, सैद्धांतिक अनुकूलन और प्रशिक्षण तथा जटिल वातावरण में प्रभावी कमान और नियंत्रण के लिए परिचालन कला की पुनर्कल्पना जैसे विषय पर सैन्य अधिकारी और विशेषज्ञ मंथन करेंगे. इसका मकसद बहु-क्षेत्रीय अभियानों दौरान नागरिक-सैन्य समन्वय की व्यापक समझ विकसित करना है. साथ ही भारतीय सैन्य बल के लिए परिचालन तत्परता बढ़ाने और बहु-क्षेत्रीय वातावरण में पारंपरिक और अनियमित दोनों प्रकार के खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रणनीतियां विकसित करने का काम होगा.

 युद्ध के तौर-तरीकों में आए बदलाव पर होगा मंथन


तकनीकी प्रगति, युद्ध के बदलते तरीके के कारण प्रकृति में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है. इससे युद्ध रणनीति, रणनीति और युद्ध में शामिल लोगों पर भी समानांतर प्रभाव पड़ रहा है. अब युद्ध तकनीक, साइबर और मनोवैज्ञानिक स्तर पर लड़े जा रहे हैं. साथ ही नयी तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है और दो देशों के बीच होने वाले युद्ध लंबा खींच रहा है. अब युद्ध सिर्फ हथियारों के बल पर नहीं जीते जा सकते हैं. इसके लिए विभिन्न स्तर पर समन्वय जरूरी हो गया है. बदलते युद्ध के तरीकों पर चर्चा के लिए 

चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ‘रण संवाद – युद्ध, युद्ध कला और युद्ध प्रक्रिया पर त्रि-सेवा पहल की शुरुआत की है. पिछले साल महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद का मुख्य विषय ‘युद्धकला पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ था. गौरतलब है कि रायसीना डॉयलॉग में वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होती है, जबकि रण संवाद में सिर्फ सैन्य बल और सुरक्षा रणनीति पर मंथन किया जाता है.

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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