सुप्रीम कोर्ट में फिर विवाद जमीन अधिग्रहण के मामले में दो बेंच आमने-सामने

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बीच एक नया विवाद सामने आया है, दरअसल जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की दो अलग-अलग बेंच के निर्णय से बहस की स्थिति बन गयी, जिसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से यह मांग की गयी है कि वे मामले में दखल […]


नयी दिल्ली :
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बीच एक नया विवाद सामने आया है, दरअसल जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की दो अलग-अलग बेंच के निर्णय से बहस की स्थिति बन गयी, जिसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से यह मांग की गयी है कि वे मामले में दखल दें और इसे सुलझायें.

बुधवार को जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ और दीपक गुप्ता की बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दिया, जिसे आठ फरवरी को जस्टिस अरुण मिश्रा, एके गयोल और मोहन एम की बेंच ने सुनाया था. 8 फरवरी को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस एमएम शांतानागौदार की बेंच ने फैसला दिया था कि सरकारी एजेंसी अगर अधिग्रहित भूमि के लिए मालिक को मुआवजे की पेशकश करें और मालिक मुआवजा लेने से इनकार कर दे तो इसे मुआवजा देना माना जाएगा.

इस आधार पर मालिक मुआवजा नहीं मिलने को वजह बताकर भूमि अधिग्रहण रद्द नहीं करवा सकता है. इस फैसले को लेकर जस्टिस एमबी लोकुर, कुरियन जोसेफ और दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि यह मामला बड़ी बेंच के पास भेजे जाने की जरूरत है. बता दें कि 2014 में भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुआवजा नहीं देना भूमि अधिग्रहण रद्द करने का आधार बनेगा.

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