सीनियर सिटीजन मरीजों के लिए अलग से नहीं है कोई सुविधा.
तिलौथू.
स्थानीय पीएचसी में मरीजों को गैस व एंटीबायटिक जैसी जरूरत की दवा भी बाजार के मेडिकल हॉल से खरीदनी पड़ रही है. मंगलवार को इमरजेंसी में भी जिस नर्स की ड्यूटी थी, वह ड्यूटी पर मौजूद नहीं थी. पीएचसी में मंगलवार को ओपीडी में डॉक्टर रामेश्वर प्रसाद ड्यूटी में तैनात थे. इन्होंने बताया की आज 107 मरीजों का चेकअप ओपीडी में किया गया. 12 पुराने पर्चा के मरीजों का इलाज किया गया. इसमें अधिकतर मौसमी बीमारी सर्दी, खांसी व बुखार के मरीज आ रहे हैं. जिनका इलाज किया गया. उन्हें दवाएं दी गयीं. वहीं, एक महिला जिसके आठ महीने के बच्चे का गर्म पानी में हाथ जल गया था. वह इलाज कराने आयी थी, जिसे अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने इमरजेंसी का पर्चा कटवाने के लिए कहा. उक्त महिला अपने हाथ जले हुए बच्चे को लेकर इधर से उधर दौड़ती रहीं. लेकिन, इमरजेंसी में कोई पर्चा काटने वाला नहीं मिला. जबकि अस्पताल में मौजूद कुछ स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कहा गया कि एक नर्स की तैनाती इमरजेंसी में है.विदित हो कि प्रखंड के महेशडीह गांव निवासी सीता देवी अपने बच्चों को लेकर आयी थी. इसके बच्चे का गर्म पानी में हाथ जल गया था. बच्चा जलन से रो रहा था, लेकिन यह महिला बहुत देर तक इमरजेंसी पर्चा कटवाने के लिए ड्यूटी में तैनात स्वास्थ्यकर्मी को ढूंढ़ती रहीं. इन्होंने बताया कि जब हम ओपीडी में गयी, तो कहा गया कि समय खत्म हो चुका है. अब जाकर इमरजेंसी का पर्चा कटवाइए, लेकिन कब से यहां पर खड़े हैं, कोई यहां पर मौजूद नहीं है. वहीं, अस्पताल परिसर में जांच कराने पहुंची कई महिला मरीजों ने कहा कि दो से तीन दवाइयां दवा काउंटर पर बाहर से लेने के लिए बोला जा रहा है.
बाहर से दवा लाने के लिए बोला गयातिलौथू निवासी रीना देवी का कहना है कि मुझे सर्दी बुखार खांसी है, जिसका इलाज कराने के लिए अस्पताल में आयी थी. डॉक्टर द्वारा चेकअप करके दवा भी लिखी गयी है. इसमें से दवा काउंटर पर दो दवा मुझे बाहर के मेडिकल से लेने की बात कही गयी है. इसमें डाइक्लोफिनेक व पैंटोप्राजोल दवाएं शामिल हैं, जबकि पतलूका गांव निवासी रीना देवी का कहना है कि हम भी अपना इलाज कराने आयी थी. मुझे भी चार में से दो दवा बाहर के काउंटर से लेने के लिए कहा गया. इसमें अमॉकसासिलिन कैप्सूल, रेबेप्राजोल दवा शामिल हैं.इलाज के लिए लगाती रही चक्कर:
तिलौथू निवासी 40 वर्षीय गीता देवी का कहना है कि हम 2:00 बजे से 10 मिनट बाद अस्पताल पहुंचे. काउंटर पर मौजूद कर्मी द्वारा कहा गया कि अब ओपीडी का समय खत्म हो गया है, अब आपका इलाज नहीं हो पायेगा. क्योंकि ऐप के माध्यम से नंबर लग रहा है. अब ऑनलाइन नंबर नहीं लगेगा. इनका कहना है कि मुझे काफी चक्कर आ रहा है. अब मेरा इलाज कैसे होगा.सीनियर सिटीजन के लिए नहीं है विशेष व्यवस्थारोहतास प्रखंड के कर्मा गांव से आये 75 वर्षीय बुजुर्ग रामचंद्र चौधरी का कहना है कि काफी लंबी लाइन में बहुत देर से खड़े हैं. कमर और पीठ में काफी दर्द हो रही है. इसलिए किनारे कुर्सी पर बैठ गये हैं. अस्पताल परिसर में सीनियर सिटीजन के लिए अलग से व्यवस्था होनी चाहिए, जो यहां पर नहीं है. मुझे काफी परेशानी हो रही है. अब मेरा जब नंबर आयेगा तब हम डॉक्टर को दिखलायेंगे. जहां एक ओर लोगों को अस्पताल के बदले बाजार से दवाई खरीदनी पड़ रही है. वहीं, मेडिकल पर औने पौने दाम पर दवा विक्रेताओं द्वारा मरीजों से लिया जाता है जबकि विभाग अस्पताल में पूरी दवा होने की दावा करती है.
क्या कहते हैं अस्पताल के जिम्मेदारदवा वितरण केंद्र में मौजूद डाटा इंट्री ऑपरेटर संजय कुमार का कहना है कि फिलहाल डेढ़ सौ दवाएं उपलब्ध है, जबकि लगभग 25 दवाएं उपलब्ध नहीं है. इन्होंने बताया कि कुछ आवश्यक दवाएं हैं, जैसे इटीनॉल, लेवोफ्लाक्सासिन, अजिथ्रोमाइसीन, पेरासिटामोल, सिफाकजिम, लेवोसाल, बॉटमल एल्बेंडाजोल, इत्यादि दवाएं उपलब्ध हैं. कुछ दवाई नहीं हैं, जो बहुत जल्द ही उपलब्ध हो जायेंगी. जबकि, बीएचएम अमरेंद्र कुमार का कहना है कि एंटी रेबीज की 50 सुई उपलब्ध है और एंटी वेनम की पांच सुई अस्पताल में उपलब्ध है, हालांकि जब इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ दयानंद प्रसाद से बात की गयी, तो इन्होंने बताया कि बीएचएम से बात कर लीजिए मुझे नहीं पता है की कितनी दवा उपलब्ध है क्योंकि मैं अभी बाहर में हूं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
