निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों और कर्मियों को सुबह पांच बजे तक अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर पहुंचना अनिवार्य था. इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान कई कर्मी अनुपस्थित पाए गए. सुबह 8 बजे तक भी एक कंप्यूटर ऑपरेटर, छह पदाधिकारी और दो चौकीदार अपने निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंचे थे. इस लापरवाही को उपायुक्त ने कर्तव्य के प्रति गंभीर उदासीनता माना.
तत्काल प्रभाव से कार्रवाई
उपायुक्त आदित्य रंजन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया. वहीं अनुपस्थित पदाधिकारियों और कर्मियों का वेतन अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश दिया गया. साथ ही सभी से स्पष्टीकरण मांगते हुए उनके खिलाफ निलंबन एवं अन्य विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया.
मेडिकल टीम भी जांच के घेरे में
निरीक्षण के दौरान मेडिकल टीम की उपस्थिति और कार्यप्रणाली भी संतोषजनक नहीं पाई गई. इस पर उपायुक्त ने नाराजगी जताते हुए सिविल सर्जन को संबंधित मेडिकल कर्मियों से स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया. साथ ही ड्यूटी पर तैनात सभी मेडिकल स्टाफ का वेतन भी अगले आदेश तक स्थगित करने को कहा गया.
निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि होमगार्ड बहाली प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
