परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी शून्य, 56 महिलाओं ने कराया बंध्याकरण

परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी अब भी नगण्य बनी हुई है.

मिशन परिवार विकास अभियान के बावजूद पुरुष नसबंदी को लेकर नहीं बढ़ी जागरूकता

सिमरी बख्तियारपुर. परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी अब भी नगण्य बनी हुई है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद पुरुष नसबंदी के प्रति लोगों में रुचि नहीं दिख रही है. हालिया आंकड़ों के अनुसार मिशन परिवार विकास अभियान के दौरान 56 महिलाओं ने बंध्याकरण कराया, जबकि पुरुष नसबंदी का आंकड़ा शून्य रहा. यह स्थिति परिवार नियोजन कार्यक्रम के लिए चिंता का विषय बन गयी है. जिला स्वास्थ्य समिति सहरसा के निर्देश पर छह मार्च से 20 मार्च 2026 तक मिशन परिवार विकास अभियान चलाया गया.

इस अभियान के तहत अनुमंडलीय अस्पताल में परिवार नियोजन से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई गयी और लोगों को छोटे परिवार के लाभ के बारे में जागरूक किया गया. इसके लिए आशा कार्यकर्ता, एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा गांव-गांव जाकर लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों की जानकारी दी गयी. इसके बावजूद पुरुष नसबंदी को लेकर लोगों में अब भी संकोच और गलत धारणाएं बनी हुई हैं. अधिकांश मामलों में परिवार नियोजन की जिम्मेदारी महिलाओं पर ही आ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुष नसबंदी एक सुरक्षित और सरल प्रक्रिया है, जिसमें जोखिम भी बहुत कम होता है, लेकिन जागरूकता के अभाव में पुरुष इससे दूरी बनाए रखते हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परिवार नियोजन की सफलता के लिए पुरुषों की भागीदारी बेहद जरूरी है. यदि पुरुष आगे आकर नसबंदी जैसे उपाय अपनायें तो महिलाओं पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा और परिवार नियोजन कार्यक्रम को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा. विभाग द्वारा आने वाले दिनों में पुरुषों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बैठक, शिविर और प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को पुरुष नसबंदी के प्रति जागरूक किया जायेगा, ताकि परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके.

प्रोत्साहन राशि भी नहीं बढ़ा पायी आंकड़ा

परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गयी है, लेकिन इसके बावजूद पुरुषों की भागीदारी बेहद कम देखने को मिल रही है. सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र में हाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो महिला बंध्याकरण के मामले जहां लगातार सामने आ रहे हैं, वहीं पुरुष नसबंदी के मामले नगण्य हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से पुरुष नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये तथा महिला बंध्याकरण कराने पर दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. इसके बावजूद पुरुष नसबंदी को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी और संकोच के कारण अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है.

हेल्थ मैनेजर अखिलेश कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस दिशा में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका, विकास मित्र और जीविका दीदियों को भी जागरूकता अभियान में जोड़ा गया है, ताकि अधिक से अधिक पुरुष नसबंदी के लिए आगे आयें.

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By Dipankar Shriwastaw

Dipankar Shriwastaw is a contributor at Prabhat Khabar.

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