जान देंगे, मगर जमीन लूटने नहीं देंगे

कांके. राज्य सरकार कहती है हम आदिवासियों के हित में कार्य कर रहे हैं. उनकी जमीन को लूटने नहीं दिया जायेगा. वहीं दूसरी ओर हमारी जमीन को केंद्र सरकार लूट

कांके.

राज्य सरकार कहती है हम आदिवासियों के हित में कार्य कर रहे हैं. उनकी जमीन को लूटने नहीं दिया जायेगा. वहीं दूसरी ओर हमारी जमीन को केंद्र सरकार लूट रही है. उक्त बातें केंद्रीय विश्वविद्यालय आदिवासी विस्थापित परिवार समिति के अध्यक्ष महावीर मुंडा व सचिव तुलसी मुंडा ने रविवार को कांके अंचल में लगे दाखिल खारिज शिविर में कहा. समिति के लोग डीसी मंजूनाथ भजंत्री से मिलकर अपनी बात रखने पहुंचे थे. लेकिन डीसी ने उनकी बात नहीं सुनीं. समिति के लोगों का कहना है कि उनकी चेड़ी मनातू स्थित भूइंहरी जमीन को केंद्रीय विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति ने रैयतों से वार्ता कर वर्ष 2012 में अधिग्रहण किया था. तब 80 एकड़ के भूइंहरी जमीन के रैयतों से कहा गया था कि उनकी जमीन अधिग्रहण के बाद उन्हें मुआवजा सहित अन्य कई सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा. विश्वविद्यालय, राज्य सरकार व रैयतों के बीच एकरारनामा कर सभी सुविधाओं का लाभ मिलेगा. तब से ग्रामीण भूइंहरी जमीन के रैयत पिछले 12 वर्षों में कई बार डीसी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक को पत्र लिखकर मामले को अवगत कराया है. इससे पूर्व समिति के लोग डीसी व केंद्रीय विवि के कुलपति के साथ वार्ता करने के उपरांत निर्णय लेंगे. कहा अपनी जान दे देंगे, लेकिन बिना शर्त अपनी जमीन को लूटने नहीं देंगे.

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By Prabhat Khabar News Desk

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