hajipur news. एइएस-चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

हाजीपुर. जिले में एइएस-जेइ यानी चमकी बुखार की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. चमकी बुखार से बचाव, इसकी रोकथाम और इलाज को लेकर जिला वेक्टर

हाजीपुर.

जिले में एइएस-जेइ यानी चमकी बुखार की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. चमकी बुखार से बचाव, इसकी रोकथाम और इलाज को लेकर जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ गुड़िया कुमारी ने सदर अस्पताल के अधीक्षक, अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अलर्ट जारी किया. साथ ही आवश्यक तैयारी का निर्देश दिया. इन सभी अस्पतालों के प्रभारियों को कहा गया है कि अपने क्षेत्र में इस पर विशेष ध्यान रखते हुए सभी एएनएम, आशा व आशा फैसिलिटेटर को निर्देश दें कि वे अपने पोषण क्षेत्र में निगरानी रखे. चमकी बुखार के बारे में लोगों को जागरूक करें और किसी भी व्यक्ति में चमकी बुखार का लक्षण पाये जाने पर तुरंत नजदीकी पीएचसी में ले जायें. जिला वीबीडीसी पदाधिकारी ने बताया कि बगल के जिले में चमकी बुखार के मरीज मिलने शुरू हो गये हैं. वैशाली जिले में अभी तक एइएस का कोई केस सामने नहीं आया है, लेकिन सभी पीएचसी को अलर्ट रहने को कहा गया है.

हर पीएचसी में दो-दो बेड की व्यवस्था

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्वास्थ्य केंद्र में एइएस-जेइ (चमकी बुखार) से संबंधित दवा एवं उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित करें. साथ ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चमकी बुखार से पीड़ित मरीजों के लिए दो-दो बेड सुरक्षित रखें. यदि चमकी बुखार से संबंधित मरीज किसी स्वास्थ्य केंद्र में आते हों, तो उनका समुचित इलाज शुरू किया जाये और तुरंत इसकी सूचना सिविल सर्जन तथा जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी को दी जाये. जिला वीबीडीसी पदाधिकारी ने बताया कि गर्मी की शुरुआत होने के साथ चमकी बुखार की शिकायतें मिलने लगती हैं. खासकर एक से 15 वर्ष तक के बच्चे इसके शिकार होते हैं. तेज बुखार, चमकी आना, बेहोश होना, मुंह से झाग आना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं. एइएस, जिसे मस्तिष्क ज्वर या चमकी बुखार कहते हैं, से पीड़ित होने वाले बच्चों के इलाज के लिए सदर अस्पताल के पीकू वार्ड में बेड के साथ मॉनीटर व अन्य आवश्यक उपकरण लगाये गये हैं. इसके अलावा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो बेडों की व्यवस्था की गयी है. एइएस-जेइ को लेकर सभी स्तरों पर तैयारी की जा रही है. सभी पीएचसी, एसडीएच व सदर अस्पताल में इस बीमारी से संबंधित दवाओं और उपकरणों का गैप एसेसमेंट किया जा रहा है. कहीं भी कोई कमी होने पर उसकी पूर्ति की जायेगी.

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By Prabhat Khabar News Desk

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