प्रतिनिधिबड़कागांव. बड़कागांव प्रखंड में इन दिनों गुड़ की सोंधी महक से वातावरण खुशनुमा है. क्षेत्र का कोलसार गुड़ के लिए कुटीर उद्योग के रूप में चर्चित है. किसान अपनी मेहनत से यहां गन्ने से गुड़ तैयार कर रहे हैं. हालांकि उन्हें सरकार की ओर से किसी तरह की सब्सिडी नहीं मिलने से किसानों में निराशा तो है, लेकिन वे अपनी मेहनत से गन्ने की खेती करने में जुटे हुए हैं. बरखा के गुड़ में आदि, बादाम, गड़ी, छुहाड़ा मिलाया जाता है. इसके अलावा रावा गुड़ में भतुवा मिलाया जाता है, जो काफी स्वादिष्ट लगता है. इन गुड़ को खाने से सर्दी खांसी भी दूर हो जाता है. यही कारण कि यहां का गुड़ देश विदेश में चर्चित है.बताया जाता है कि वर्ष 2008 में तिलानाथ सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में चीनी फैक्टरी खोलने के लिए बड़कागांव में झारखंड सरकर की ओर से प्रयास किये गये थे, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. बड़कागांव प्रखंड के विभिन्न गांवों में गन्ने की खेती की जाती है. मशीन में गन्ने की पेराई के बाद गुड़ का निर्माण यहां होता है. गन्ने के रस निकालने के लिए कोलसार में मशीन लगायी जाती है. बड़े चूल्हे में भाट बनाने के बाद अन्य प्रक्रियाओं से गुजरते हुए यहां ढेला गुड़ का निर्माण होता है.
कहां-कहां बनता है गुड़ :
बड़कागांव के हुरलंगबागी, चोरका, पड़रिया, सिकरी, डाड़ी, महटिकरा, केरिगढा, गोंदलपुरा, जोराकाठ, बाबूपारा, राउतपारा, बादम, हरली, नापो, कांडतरी, खराटी, खैरातरी, पगार, हेठगढ़ा, बरवाडीह, सांढ़ व चुरचू समेत अन्य गांवों में दर्जनों गुड़ बनाने वाली छोटी-छोटी फैक्टरी है. इन्हीं गांवो में गन्ने का उत्पादन भी होता है.आस्ट्रेलियाई को भी भाया गुड़ :
अदरक के गुड़ को आस्ट्रेलियन भी पसंद कर रहे हैं. यहां गन्ने की रस के साथ अदरक व भतुवा को मिला कर गुड़ तैयार किया जाता है. पिछले वर्ष ही ऑस्ट्रेलिया के जफ्रेडी व जल्फ्रेड बड़कागांव बाजार पहुंचे थे.ये आस्ट्रेलियन परिवार पिपरवार से लौट रहा था. बाजार में गुड़ देख इनके कदम रुक गये. बाजार में अदरक का गुड़ खरीद परिवार के लोग काफी खुश हुए. उन्होंने भी यहां के गुड़ की सराहना की.गुड़ का होता है निर्यात :
बड़कागांव से विभिन्न शहरों व राज्यों में गुड़ का निर्यात होता है. केरेडारी व बड़कागांव प्रखंड के विभिन्न गांवों से दैनिक बाजार में गुड़ लाया जाता है. यहां के बने गुड़ हजारीबाग, रांची, पटना, जमशेदपुर समेत अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं.क्या कहते हैं किसान :
झारखंड कृषि विशेषज्ञ प्रवीण कुमार, मुरली महतो के अनुसार बड़कागांव, केरेडारी, टंडवा व सिमरिया क्षेत्र में गुड़ उत्पादन अधिक होता है. इससे सरकार को काफी लाभ मिल सकता है़. लेकिन सरकार की नीति के कारण यहां के किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है. कांडतरी के कृषक महिरंजन महतो के अनुसार गन्ना उत्पादन में सरकार का सहयोग नहीं मिलता है. यदि सरकार सहयोग करे, तो गुड़ उत्पादन में बड़कागांव पूरे भारत में पहला स्थान पा सकता है. मुरली महतो ने कहा कि गुड़ निर्माण में किसानों को सब्सिडी मिले.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
