लोभ व तृष्णा का त्याग करना सिखाता है उत्तम शौच धर्म

लोभ व तृष्णा का त्याग करना सिखाता है उत्तम शौच धर्म

मेदिनीनगर ़ जैन धर्मावलंबियों के दस लक्षण पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के चौथे दिन रविवार को उत्तम शौच धर्म का पूजा अनुष्ठान हुआ. जैन समाज के लोगों ने पूजा अनुष्ठान में बढ़चढकर हिस्सा लिया. बाल ब्रह्मचारी अन्नू भैया ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या करते हुए जीवन के संपूर्ण विकास में उसके महत्व के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि उत्तम शौच धर्म हम सभी को लोभ और तृष्णा का त्याग करना सिखाता है. साथ ही अपने जीवन में संतोष व शुचिता को अपनाने का संदेश देता है. यह धर्म हमें बताता है कि सच्ची शुद्धि शारीरिक न होकर मन की भीतर की पवित्रता है, जो लोभ से मुक्त होकर प्राप्त होती है. संतोषी व्यक्ति ही सच्चा सुख पाता है, क्योंकि इच्छाएं कभी पूरी नहीं होतीं. जबकि इच्छाओं को त्यागने से मनुष्य पूर्णता को प्राप्त करता है. उन्होंने बताया कि उत्तम शौच धर्म में लोभ को सभी पापों और दुखों का मूल कारण माना जाता है. यह हमें सिखाता है कि लोभ से तृष्णा और फिर मोह उत्पन्न होता है, जो दुख में वृद्धि करता है. इस धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति में संतोष रखता है. ईश्वर ने जो कुछ उसके पास दिया है, उसके लिए कृतज्ञता व्यक्त करना और उसी में प्रसन्न रहना उत्तम शौच का मार्ग है. उन्होंने बताया कि शौच का अर्थ केवल बाहरी सफाई नहीं है, बल्कि विचारों और अभिप्रायों की पवित्रता है. शरीर की शुद्धि से आत्मा शुद्ध नहीं हो सकती, बल्कि लोभ,मोह,तृष्णा,द्वेष जैसी आंतरिक बुराइयों का त्याग करने से ही आत्मा शुद्ध होती है. मन की इच्छाएं आत्मा को दरिद्र बनाती है. सच्ची पूर्णता इच्छाओं को त्याग करने और संतोषी स्वभाव का बनने से ही मिलती है. उत्तम शौच धर्म एक ऐसा मार्ग है जो हमें लोभ छोड़कर संतोष रूपी धन को अपनाने और अपनी आंतरिक शुचिता को विकसित करके सुखी व पवित्र जीवन जीने की प्रेरणा देता है. भगवान श्रीजी के अभिषेक पूजन के बाद सभी श्रावकों ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या पूरे भक्ति भाव से श्रवण किया. सौधर्म इंद्र के रूप में सुभाष कुमार, सुनील कुमार, राजीव कुमार रारा (सुप्रिया) और श्रावक श्रेष्ठी के रूप में महावीर प्रसाद, विनय कुमार बाकलीवाल ने श्रीजी का प्रथम अभिषेक व शांतिधारा किया. प्रतिष्ठाचार्य अन्नू भैया की प्रेरणा से शनिवार की रात्रि में जैन मंदिर में सम्मान समारोह हुआ. जैन समाज के सभी वरिष्ठ माता, पिता, दादा, दादी को उनके ही परिवार के बच्चों ने पाद प्रक्षालन करने के बाद तिलक लगाकर और शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया. मौके पर सरस जैन,राजुल बाकलीवाल,सुधा कासलीवाल,संजय रारा, अमित गंगवाल, किशोर रारा, रोहित जैन,बबीता काला, अजीत जैन सहित काफी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे.

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