जिला स्तरीय कृषि टास्कफोर्स की हुई बैठक
सहरसा. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला स्तरीय कृषि टास्क फोर्स की बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी ने संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी दी. जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि गरमा मौसम में मूंग का आच्छादन 36 हजार हेक्टेयर में होता है. यहां पर किसान गेहूं की कटाई के बाद ही मूंग की खेती करते हैं. बाद में इसकी खेत में जुताई कर हरी खाद के रूप में प्रयोग करते हैं. वर्तमान में जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. वर्तमान में एक लाख 12 हजार 38 बैग यूरिया, 84 हजार 954 बैग डीएपी, 45 हजार 692 बैग एमओपी, 73 हजार 664 बैग एनपीके एवं 10 हजार 709 बैग एसएसपी उपलब्ध है.किसानों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने का निर्देश
जिलाधिकारी ने निदेशित किया कि जिला में उर्वरक के परिचालन, वितरण, भंडारण एवं बिक्री के संबंध में समय समय पर संबंधित उर्वरक निरीक्षक द्वारा जांच कराएं एवं कृषकों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराएं. जिला उद्यान कार्यालय द्वारा बताया गया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्राप्त लक्ष्य की शत प्रतिशत उपलब्धि कर ली गयी है. इस वित्तीय वर्ष का लक्ष्य अद्यतन अप्राप्त है. जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि बांध के अंदर के किसी गांव का चयन कर प्रत्येक सप्ताह के बुधवार को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार एवं किसानों को उद्यानिक फसलों का प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करें. परियोजना निदेशक, आत्मा ने बताया कि विभिन्न घटकों में प्राप्त आवंटन के आलोक में शत प्रतिशत उपलब्धि कर ली गयी है.सहायक निदेशक रसायन के प्रतिनिधि ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में शत प्रतिशत उपलब्धि कर ली गयी है. इस वित्तीय वर्ष का लक्ष्य अद्यतन अप्राप्त है. जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने बताया गया कि सभी प्रखंडों में वर्षामापी यंत्र कार्यरत है. सहायक निदेशक ईख विकास के प्रतिनिधि ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में शत प्रतिशत उपलब्धि कर ली गयी है. इस वित्तीय वर्ष का लक्ष्य अद्यतन अप्राप्त है. सहायक निदेशक कृषि अभियंत्रण ने बताया गया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्राप्त लक्ष्य का शत प्रतिशत उपलब्धि कर ली गयी है. इस वित्तीय वर्ष का लक्ष्य अद्यतन अप्राप्त है.
बैठक में वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर के प्रतिनिधि ने बताया कि कुल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 223 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है. कृषि विज्ञान केंद्र में गेहूं नौ हेक्टेयर, सरसों 03.18 हेक्टेयर, तीसी 0.04 हेक्टेयर एवं आलू 0.25 हेक्टेयर में बीज उत्पादन किया जा रहा है. जिलाधिकारी ने जिला में जलवायु के तहत गेहूं, धान एवं मक्का के अलावे कौन-कौन सी फसल की खेती किसानों के लिए लाभप्रद होगी का विस्तृत प्रतिवेदन एक सप्ताह में उपलब्ध कराने के लिए निदेशित किया. कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल ने बताया कि अभी मुख्य नहर से बालू हटाया जा रहा है. जिसके कारण पानी नहरों में नहीं है. कार्य पूर्ण होने के बाद पानी की आपूर्ति नहरों में अंतिम छोड़ तक पहुंच जायेगा.