Jharsuguda News: झारसुगुड़ा नगर परिषद के एकाताली क्षेत्रवासियों में श्मशान घाट के स्थानांतरण की मांग पूरी नहीं होने से असंतोष देखा जा रहा है. क्षेत्र के लोग बार-बार श्मशान को स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि घर के आंगन से शवदाह का दृश्य दिख रहा है. शव को आग लगाकर जलाने पर निकलने वाला धुआं पास की बस्ती के लोगों को परेशान कर रहा है. छोटे-छोटे बच्चे भी यह दृश्य देखकर परेशान हो रहे हैं.
चुनाव से पहले बनी थी स्थानांतरण की योजना, अब ठंडे बस्ते में
बीटीएम से एकाताली जाने वाले रास्ते के किनारे यह बस्ती स्थित है. बस्ती में 40 से अधिक परिवार रहते हैं. लगभग एक दशक से इन परिवारों द्वारा यहां शवदाह नहीं करने की मांग को लेकर नगर परिषद के अधिकारियों का ध्यानाकर्षण कराया जाता रहा है. लेकिन परिणाम शून्य है. लोहे के खंभे गाड़कर शवदाह के लिए यहां व्यवस्था की गयी है. नियमित रूप से यहां शव लाकर जलाये जा रहे हैं. शव जलने की दुर्गंध आसपास के लोगों के लिए असहनीय हो रही है. फिर भी वे सिर छिपाए हुए हैं. पिछले आम चुनाव से पहले यहां से श्मशान को स्थानांतरित करने के प्रयास के तहत राजस्व निरीक्षक द्वारा वैकल्पिक भूमि की पहचान की गयी थी. लेकिन चुनाव के बाद यह लागू नहीं हुआ.
वैकल्पिक स्थान ढूंढ़कर श्मशान को स्थानांतरित किया जायेगा : कार्यकारी अधिकारी
स्थानीय निवासी रंजीत मेहर ने कहा कि इस श्मशान से कुछ ही दूरी पर कल्याण मंडप का निर्माण किया गया है. पास में एक हाइस्कूल और दो प्राथमिक विद्यालय भी हैं. प्रतिदिन छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं और स्कूल से श्मशान दिखायी देता है. जिसका नकारात्मक प्रभाव बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है. इस संबंध में पूछे जाने पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मानस रंजन मल्लिक ने कहा कि वे इस समस्या से अवगत हैं. उन्होंने कहा कि वे स्थानीय काउंसलर और लोगों के साथ संपर्क में हैं और जल्द ही इसके लिए वैकल्पिक स्थान ढूंढ़कर श्मशान को स्थानांतरित किया जायेगा.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
