जब तक बुनकरों के जीवनस्तर में सुधार नहीं होगा, तब तक भागलपुर सिल्क सिटी का आधार मजबूत नहीं हो सकता और न ही विकास. लंबे संघर्ष के बाद बुनकरों के लिए खुशखबरी है कि चंपानगर में उनके विशेष स्वास्थ्य सुविधा के लिए अस्पताल बनकर तैयार हो गया. अब बुनकरों के बीच फैल रही कान, आंख, सांस आदि की बीमारी का इलाज आसानी से होगी.
चंपानगर दोना गाछ बिषहरी स्थान के समीप हुआ निर्माण
बिषहरी स्थान, दोना गाछ, चंपानगर में 2200 वर्गफीट क्षेत्र में अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है. लगातार प्रयास और जमीन चिह्नित कराने में मदद करने पर अस्पताल निर्माण का रास्ता साफ हो गया. मो हसनैन अंसारी ने बताया कि एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निजी भवन में चल रहा है, लेकिन यहां संसाधन का अभाव है. यहां केवल भवन का किराया हजारों रुपये मकान मालिक को प्रतिमाह चुकाना पड़ रहा है. निजी भवन में कई कमियां हैं. यहां इंजेक्शन व महत्वपूर्ण दवा नहीं रख रहे हैं. साथ ही बुनकरों की आंख व कान की जांच करने में कठिनायी हो रही है. बुनकर प्रतिनिधि मो सिकंदर आजम ने बताया कि आठ साल पहले खुला शहरी पीएचसी वृद्धाश्रम में चल रहा था. वहां से हटने के बाद एक निजी भवन में शिफ्ट कर दिया गया.
70 हजार बुनकर परिवारों नहीं लगाना होगा जिला अस्पताल व मायागंज का चक्कर
बुनकर बहुल क्षेत्र में अस्पताल बनने से 70 हजार से अधिक बुनकर व सामान्य परिवार को स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी. जिला सदर माॅडल अस्पताल व मायागंज अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना होगा. जदयू के वरिष्ठ नेता हाजी मेराजउद्दीन, बुनकर संघर्ष समिति के नेजाहत अंसारी समेत हेमंत कुमार, सिकंदर आजम, मो अशफाक अंसारी, जुम्मन अंसारी बताया कि बुनकर बहुल क्षेत्र में अस्पताल की सुविधा मिलने से कई बीमारी का इलाज आसानी से हो सकेगा. अधिकतर बुनकर लूम की आवाज से कान की बीमारी व बल्ब की रोशनी में काम करने से आंख की बीमारी से पीड़ित हैं.
बुनकर प्रतिनिधि हसनैन अंसारी ने किया लंबा संघर्ष
अब्दुल कय्यूम अंसारी बुनकर मंच के अध्यक्ष मो हसनैन अंसारी ने बताया कि उनके लंबे संघर्ष का नतीजा है कि यह भवन बनकर तैयार हुआ. 2011 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बुनकरों के लिए अस्पताल की मांग की गयी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तत्कालीन मुख्य सचिव व स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया था. 2011 में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बुनकर बहुल क्षेत्र में छह बेड वाला अस्पताल खोलने की घोषणा की थी. एनयूएचएम के अंतर्गत शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नये भवन निर्माण के लिए जिलाधिकारी ने राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक को पत्र लिखकर जमीन उपलब्ध होने की जानकारी छह साल पहले दी थी. इसको लेकर प्रक्रिया शुरू हो गयी थी और छह बेड के अस्पताल का प्रस्ताव तैयार किया गया था. फिर शहरी पीएचसी खोलकर अस्पताल को ठंडे बस्ते डाल दिया गया था, हालांकि लगातार प्रयास करते रहे और सपना साकार हो गया.
Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.