हिट एंड रन केस : समन्वय व जागरूकता के अभाव में मुआवजे से वंचित हैं 59 परिवार

मुंगेर जिले से एनएच-80, एनएच-333 और एनएच-333 बी गुजरा है. स्टेट हाइवे के अतिरिक्त भी सड़कों का जाल बिछा हुआ है.

सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने कहा- समन्वय स्थापित कर करें काम, पीड़ितों को दिलायें अधिकार

मुंगेर. मुंगेर जिले से एनएच-80, एनएच-333 और एनएच-333 बी गुजरा है. स्टेट हाइवे के अतिरिक्त भी सड़कों का जाल बिछा हुआ है. जिस पर वाहनों का दबाव काफी है और यातायात नियमों की खुले आम धज्जियां उड़ रही है, जिसके कारण हर साल लगभग 70 से 80 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है और 150 से 200 लोग घायल होते हैं, लेकिन हिट एंड रन मामले में मिलने वाला लाभ प्राप्त करने वालों की संख्या काफी कम है, क्योंकि विभाग, थाने के बीच समन्वय और जागरूकता की घोर कमी है.

125 में से मात्र 66 को ही विभाग दिला पाया मुआवजा

परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो, हिट एंड रन के कुल 125 मामले विभाग के पास आये. इसमें जांच-पड़ताल के बाद 87 आवेदनों को जीआइसी मुंबई को भेजा गया है. इसमें 66 मामलों का निष्पादन हो पाया है. जिसके कारण अबतक मात्र 62 मृतक के आश्रितों को ही दो-दो लाख रुपये इस योजना के तहत मुआवजा राशि के तौर पर भुगतान किया जा सका है, जबकि मात्र चार घायलों को ही प्रति घायल 50 हजार के हिसाब से मुआवजा राशि का भुगतान किया जा सका है. अब भी 59 परिवार ऐसे हैं, जो इस लाभ से वंचित हैं, क्योंकि इन मामलों में डॉक्यूमेंट की कमी है. किसी में पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं है तो, किसी में अन्य कागजात की कमी है. जिसके कारण परिवहन विभाग इन आवेदनों को जीआइसी मुंबई नहीं भेज पा रहा है.

आपसी समन्वय और जागरूकता का दिख रहा घोर अभाव

हादसों की संख्या और मुआवजे के मामले में काफी फर्क है. इसके पीछे एक कारण यह है कि विक्टिम और मृतक के परिजनों को योजना के बारे में जानकारी का अभाव है. जबकि घटना के बाद थाना और विभाग के बीच आपसी समन्वय का घोर अभाव है. कई मामलों में हिट एंड रन में मृतक के परिजनों को मुआवजा इसलिए नहीं मिल पाया है, क्योंकि कई मामलों में एफआइआर दर्ज नहीं हुई, तो कई मामलों में मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है. कई मामलों में संबंधित थाना पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं समर्पित नहीं किया गया. जिसके कारण मुआवजा मिलने में मुश्किल हो रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है कि हिट एंड रन केस में पुलिस पीड़ित को निश्चित तौर पर मुआवजे की योजना के बारे में सूचित करे और इसका लाभ पीड़ित कैसे ले सकते हैं, इसके बारे में उन्हें जानकारी दे.

जिलाधिकारी ने सेल गठित करने का दिया निर्देश

जिलाधिकारी निखिल धनराज हिट एंड रन मामले में लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए निर्देश दिया कि इसके लिए जिम्मेदार आपसी समन्वय स्थापित कर काम करें. ऐसे केस में मृत व्यक्ति व घायलों के पीड़ित परिजनों के साथ संवेदनशील बनें. ऐसे पीड़ित लोगों के आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई करें तथा उन्हें मुआवजे की राशि दिलाएं. किसी कारण अथवा दस्तावेज की कमी के कारण उनका आवेदन लंबित है तो पीड़ित से संपर्क करें और जो भी दस्तावेज आवेदन में नहीं है, उसे बनाने में उनकी मदद करें. संबंधित विभाग से पत्राचार कर दस्तावेज की मांग करें. इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेज नहीं दिया जाता है तो तत्काल उनके खिलाफ कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि हिट एंड रन केस के किसी भी पीड़ित को मुआवजा का लाभ दिलाने में किसी भी कीमत पर विलंब न करें. इसके लिए एक सेल का भी गठन कर लें, ताकि इसकी फाइल को डील करने के लिए सभी अपने-अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे.

विभाग थाने से समन्वय स्थापित कर काम कर रही है. अब तक 125 में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद 87 आवेदन को इंश्योरेंस कंपनी जीआइसी मुंबई को भेज गया. जिसमें से 66 पीड़ित पक्ष को हिट एंड रन मामलों में इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा दिलाया जा चुका है.

सुरेंद्र कुमार अलवेला, जिला परिवहन पदाधिकारीB

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