Divorce in India: तलाक के बाद जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना आसान नहीं होता. समाज की बातें, टूटे रिश्ते की यादें और फ्यूचर की चिंता अक्सर लोगों को नई शुरुआत करने से रोकती हैं. ऐसे में जब दोबारा प्यार या रिश्ते की बात आती है, तो सबसे बड़ी लड़ाई बाहर की नहीं, बल्कि अपने मन के भीतर चल रही होती है.
मैचमेकिंग ऐप Rebounce के अप्रैल से जून 2026 के बीच किए गए एक सर्वे में 30 से 45 वर्ष की उम्र के 9,384 तलाकशुदा और अलग रह रहे लोगों की राय ली गई. सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर लोगों के लिए नई जिंदगी की शुरुआत करने से पहले खुद को फिर से समझना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.
शादी के बाद खुद की पहचान खोने का एहसास
सर्वे में शामिल 35 साल से ज्यादा उम्र की करीब 47 % महिलाओं ने माना कि तलाक के बाद खुद को एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था. लंबे समय तक परिवार और रिश्ते को प्रायोरिटी देने के बाद कई महिलाओं को यह समझने में समय लगा कि उनकी अपनी पसंद, सपने और पहचान क्या है.
दोबारा डेटिंग को लेकर झिझक
मैचमेकिंग ऐप Rebounce के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 9,384 पार्टिसिपेंट्स में से 5,432 लोगों ने कहा कि वे दोबारा रिश्ता शुरू करने के लिए तैयार तो हैं, लेकिन रोमांस और डेटिंग को लेकर उनका कान्फीडेंस पहले जैसा नहीं रहा. कई महिलाओं ने बताया कि अब किसी से पहले बात करने में झिझक होती है, जबकि कई पुरुषों को डर रहता है कि कहीं वे असहज या अनुभवहीन न लगें.
तलाक की वजह बार-बार बताने का दबाव
सर्वे में 5,500 से ज्यादा लोगों ने कहा कि नए रिश्ते की शुरुआत करते समय वे अक्सर बिना पूछे ही अपने तलाक की पूरी कहानी बताने लगते हैं. इसकी वजह यह है कि उन्हें लगता है कि अगर वे पहले से सब कुछ नहीं बताएंगे तो सामने वाला उन्हें गलत समझ सकता है.
सर्वे में शामिल दिल्ली की सिंगल मदर ने बताया तलाक के बाद नई शुरुआत आसान नहीं था
सर्वे में ईशा ने कहा, "शुरुआत में यह सफर मेरे लिए बहुत थकाने वाला था। मैं हर उस व्यक्ति को, जिससे मेरी बातचीत होती थी, अपने साथ हुई हर बात बताती थी और यह साबित करने की कोशिश करती थी कि मैंने तलाक का फैसला क्यों लिया. बाद में मुझे एहसास हुआ कि सामने वाले मुझे जज नहीं कर रहे थे, बल्कि मैं खुद ही अपने फैसले पर सवाल उठा रही थी और खुद को जज कर रही थी."
