Soneri Mahal Tour: ऐतिहासिक जगहों पर घूमने का रखते हैं शौक, तो सोनेरी महल हो सकता है एक मजेदार ऑपशन

Soneri Mahal Tour: सोनेरी महल का इतिहास 17 वीं शताब्दी का है. इसका निर्माण 1691 से 1653 के बीच हुआ था. इसके निर्माण में लगभग 50000 रुपए की कीमत लगी. हम यहां पर आपको बताने जा रहे हैं महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित सोनेरी महल के बारे में

Soneri Mahal Tour:  घूमने फिरने का शौक रखने वालों के लिए आज हम एक एतिहासिक किले का मजेदार ऑपशन लेकर आए हैं, जिसकी भव्यता और विलासिता आपको मंत्रमुग्ध कर देगी. इस पर्यटक स्थल का इतिहास 17 वीं शताब्दी का है. इसका निर्माण 1691 से 1653 के बीच हुआ था. इसके निर्माण में लगभग 50000 रुपए की कीमत लगी. हम यहां पर आपको बताने जा रहे हैं महाराष्ट्र  के औरंगाबाद स्थित सोनेरी महल के बारे में

सोनेरी महल की सुंदरता और ऐतिहासिकता के चलते यह न सिर्फ औरंगाबाद में बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध स्थल है. बुन्देलखण्ड के एक राजा जो औरंगजेब के साथ दक्कन गए थे, ने 1651 और 1653 ई. के बीच सोनेरी महल का निर्माण कराया. इस मशहूर महल के निर्माण की लागत  करीब  50000 रुपये थी. इसे 1934 ई. में हैदराबाद के निजाम को 26400 रुपये में बेच दिया गया था. महल को 1970 के दशक में एक क्षेत्रीय संग्रहालय में बदल दिया गया था, जिसके मेहराबों पर प्लास्टर किया गया था और उन्हें ईंटों से बंद कर दिया गया था. संग्रहालय अंततः 1979 में पूरा हुआ.

भारत के धरोधर

सोनेरी महल घूमने की जानकारी
मेरे प्रिय पाठक आपका प्रेम पूर्वक नमस्कार हमारे इस नए  लेख में , इस लेख में हम महाराष्ट्र के औरंगाबाद में सोनेरी महल घूमने की जानकारी देंगे.

 

सोनेरी महल घूमने की जानकारी

सोनेरी महल पर्यटक स्थल औरंगाबाद में स्थित है. यह एक ऐतिहासिक पर्यटक स्थल है. इसकी सुंदरता और ऐतिहासिकता के चलते यह न सिर्फ औरंगाबाद में बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध स्थल है. आइए चलते हैं इस पर्यटक स्थल के इतिहास में. औरंगाबाद की अधिकांश सांस्कृतिक विशेषताएँ इसी महल में मौजूद हैं.

सोनेरी महल का इतिहास

इस पर्यटक स्थल का इतिहास 17 वीं शताब्दी का है. इसका निर्माण 1691 से 1653 के बीच हुआ था. इसके निर्माण में लगभग 50000 रुपए की कीमत लगी.
1934 में इस महल को ₹26400 में हैदराबाद के निज़ाम को बेच दिया गया था.

कुछ  ऐसी है सोनेरी महल की संरचना

सोनेरी महल पर्यटक स्थल की संरचना  दो मंज़िल इमारत के रूप में है. इसका निर्माण संपूर्ण रूप से राजपूत शैली में किया गया है. महल में सोने से बनी कई पेंटिंग मौजूद है इसीलिए इसका नाम सोनेरी महल रखा गया. इस महल में पत्थर और संगमरमर पर बेहद ही सुंदर नक्काशी की गई है.  समग्र रूप में इस महल की नक्काशी देखने लायक है. सोनेरी महल के बाहर स्थित है एक बेहद सुंदर बगीचा जिस को कृत्रिम रूप से और सुंदर आकार में ढाला गया है. सोनेरी महल का प्रवेश द्वार देखने लायक है, इसकी बारीक नक्काशी पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है.

सोनेरी महल संग्रहालय

अपनी ऐतिहासिकता के चलते सोनेरी महल को 1979 में एक संग्रहालय के रूप में तब्दील कर दिया गया था.  एक संग्रहालय के रूप में इस महल में मौजूद हैं कई एंटीक पीस एवं प्राचीन पेंटिंग. अब यह संग्रहालय डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी के कैंपस में स्थित है. इस संग्रहालय को देखने लोग दूर-दूर से आते हैं.

सोनेरी महल का औरंगाबाद फेस्टिवल

औरंगाबाद फेस्टिवल अथवा महोत्सव का केंद्र ही सोनेरी महल है. महोत्सव का आयोजन हर साल दिसंबर-जनवरी के महीने में होता है. यह एक संपूर्ण रूप से लोकप्रिय महोत्सव है.  यहां पर आकर नाटककार एवं संगीतकार अपनी सांस्कृतिक कला का प्रदर्शन करते हैं. इसके अलावा यहां पर आपको क्षेत्रीय कलाकारों की स्टाल भी मिल जाएगी. हम पर्यटकों को यह सलाह देंगे कि यदि वे औरंगाबाद आएं तो वे सुनहरी महल का यह औरंगाबाद फेस्टिवल देखना ना भूलें.  यह महोत्सव बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस महोत्सव में औरंगाबाद की सांस्कृतिक विशेषता की झलक सहज रूप में दिखाई देती है.

सोनेरी महल घूमने की सामान्य जानकारी

सोनेरी महल में प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए मात्र ₹10 है और विदेशों के लिए यह शुल्क ₹100 है.  यह महल सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुला रहता है.  हर सप्ताह सोमवार को यह महल बंद रहता है.

सोनेरी महल कैसे जाएं

सोनेरी महल जाने के लिए औरंगाबाद से टैक्सी अथवा कैब की सुविधा उपलब्ध है. यह महल औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.  बीवी के मकबरा से सोनेरी महल 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. अतः सोनेरी महल जाने के लिए पर्यटकों को कैब अथवा टैक्सी की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो जाएगी.

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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