Jharkhand Handloom: झारखंड अपनी खूबसूरत वादियों, आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक हाथ से बनाई गई चीजें के लिए पूरे देश में जाना जाता है. इन्हीं में से एक है यहां का हैंडलूम. यहां के बुनकर सालों से कपड़े बुनते आ रहे हैं. इन कपड़ों में सिर्फ धागे नहीं जुड़े होते, बल्कि झारखंड की संस्कृति, परंपरा और लोगों की मेहनत भी दिखाई देती है.
हैंडलूम क्या होता है?
आसान भाषा में समझें तो हैंडलूम यानी ऐसे कपड़े जो मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से चलने वाले करघे पर बनाए जाते हैं. इन्हें तैयार करने में समय और मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन यही वजह है कि ये कपड़े मजबूत, आरामदायक और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं.
झारखंड का हैंडलूम क्यों अलग है?
झारखंड के कई इलाकों में आज भी बुनकरी लोगों की रोजी-रोटी का जरिया है. यहां के कारीगर सूती धागे, तसर सिल्क और दूसरे प्राकृतिक रेशों से खूबसूरत कपड़े तैयार करते हैं. इन कपड़ों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें स्थानीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है. सादगी, प्राकृतिक रंग और बेहतरीन बुनाई इन्हें बाकी कपड़ों से अलग बनाती है.
सरकार और कई संस्थाएं समय-समय पर मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन भी करती हैं, ताकि बुनकरों को अच्छा बाजार मिल सके और उनके काम की पहचान पूरे देश तक पहुंचे.
झारखंड में कौन-कौन से हैंडलूम कपड़े मिलते हैं?
1. तसर सिल्क
झारखंड का नाम आते ही सबसे पहले तसर सिल्क की बात होती है. इसकी हल्की सुनहरी चमक और मजबूत कपड़ा लोगों को खूब पसंद आता है. इससे साड़ी, स्टोल, दुपट्टा, कुर्ता, शॉल और ड्रेस मटेरियल तैयार किए जाते हैं. आजकल तसर सिल्क पारंपरिक ही नहीं, मॉडर्न फैशन का भी हिस्सा बन चुका है.
2. कॉटन हैंडलूम
झारखंड के बुनकर हाथकरघे पर सूती कपड़े भी तैयार करते हैं. इनसे साड़ी, धोती, गमछा, तौलिया, बेडशीट और ड्रेस फैब्रिक बनाए जाते हैं. ये कपड़े हल्के होते हैं और रोज पहनने के लिए काफी आरामदायक माने जाते हैं.
3. तसर और कॉटन का मिक्स
आजकल कई बुनकर तसर सिल्क और कॉटन को मिलाकर भी कपड़े तैयार कर रहे हैं. इससे कपड़ा मजबूत भी रहता है और कीमत भी थोड़ी कम होती है. इस फैब्रिक से साड़ी, स्टोल और कुर्ते काफी पसंद किए जाते हैं.
4. जनजातीय डिजाइन वाले कपड़े
झारखंड के कई हैंडलूम कपड़ों पर संथाल, मुंडा, उरांव और हो जैसी जनजातियों की कला से प्रेरित डिजाइन बनाए जाते हैं. इन डिजाइन में पारंपरिक आकृतियां और स्थानीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. यही डिजाइन इन कपड़ों को खास पहचान दिलाते हैं.
5. घर सजाने वाले हैंडलूम प्रोडक्ट
झारखंड के बुनकर सिर्फ पहनने वाले कपड़े ही नहीं बनाते, बल्कि टेबल रनर, कुशन कवर, परदे, बेड कवर और दूसरे होम डेकोर प्रोडक्ट भी तैयार करते हैं. इनकी मांग अब दूसरे राज्यों में भी तेजी से बढ़ रही है.
हैंडलूम खरीदना क्यों अच्छी बात है?
जब आप हैंडलूम का कोई सामान खरीदते हैं, तो सिर्फ एक कपड़ा नहीं खरीदते, बल्कि किसी कारीगर की मेहनत और उसकी कला का सम्मान करते हैं. इससे गांव के बुनकरों को रोजगार मिलता है, पारंपरिक कला बची रहती है और पर्यावरण को भी नुकसान कम होता है. यही वजह है कि आज 'वोकल फॉर लोकल' के दौर में हैंडलूम उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है.
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