लोग अक्सर करते हैं ये बड़ी गलती: कहीं आप भी तो नहीं खा रहे खराब आटे की रोटियां?

Stale Dough Side Effects: क्या आप भी दो दिन पुराना आटा फ्रिज से निकालकर रोटियां बनाते हैं? यह आदत आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. जानिए गूंथे हुए आटे की सही समय-सीमा, खराब आटे की पहचान और इससे होने वाले स्वास्थ्य जोखिम.

Stale Dough Side Effects: हर किसी के घर में सुबह और शाम रोटियां बनती ही हैं. इसके लिए आटा तो गूंथना ही पड़ता है. कई बार हम सुविधा के लिए एक ही बार में ज्यादा आटा गूंथ लेते हैं, और फिर उसे फ्रिज में रखकर अगले दिन या कभी-कभी दो-तीन दिन तक इस्तेमाल करते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है?

कितनी देर तक सुरक्षित है गूंथा हुआ आटा?

जब आप सूखे आटे में पानी मिलाकर उसे गूंथते हैं, तो उसमें नमी आ जाती है. यही नमी आटे को जल्दी खराब भी कर देती है. कमरे के तापमान पर गूंथा हुआ आटा केवल 6 से 8 घंटे तक ही ठीक रहता है. अगर मौसम गर्म है तो यह समय 3-4 घंटे तक ही सीमित हो जाता है. इसके बाद उसमें खटास आनी शुरू हो जाती है और वह खाने लायक नहीं रहता.

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क्या फ्रिज में रखा आटा सुरक्षित होता है?

यदि आप आटे को फ्रिज में रखना चाहते हैं, तो उसे एयरटाइट डिब्बे में भरें और ऊपर से सूखे कपड़े या प्लास्टिक शीट से ढक दें. ऐसे में यह आटा करीब 2 दिन तक सुरक्षित रह सकता है. हालांकि, समय के साथ इसका स्वाद और टेक्सचर बदल सकता है. अगर आपके घर में बार-बार लाइट जाती है और फ्रिज गर्म हो जाता है, तो एक दिन से ज़्यादा इसे स्टोर करना खतरनाक हो सकता है.

कैसे पहचानें कि आटा खराब हो चुका है?

  • अजीब या खट्टी गंध आना
  • आटे का चिपचिपा होना
  • काले या हरे धब्बे दिखना
  • पानी छोड़ना या बहुत ज्यादा सख्त हो जाना

खराब आटा खाने से क्या हो सकता है?

अगर आप गलती से खराब आटे से बनी रोटियां खा लेते हैं, तो आपको फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, या पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. खासतौर पर गर्मियों और बरसात में बासी आटा और भी जल्दी खराब होता है, इसलिए हमेशा ताजा आटा ही इस्तेमाल करें.

सुरक्षित रहने के टिप्स

  • जितना जरूरत हो, उतना ही आटा गूंथें
  • अगर स्टोर करना हो, तो साफ-सुथरे और एयरटाइट कंटेनर में रखें
  • बार-बार हाथ लगाने से बचने के लिए आटे को छोटी-छोटी मात्रा में अलग-अलग डिब्बों में रखें
  • फंगस या बदबू आते ही आटे को फेंक दें, सेहत से समझौता न करें

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(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है. इस लेख में दिये गये लेख को अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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लेखक के बारे में

Author: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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