Spiritual Leaders for World Peace: अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश ने अपने एकदिवसीय वृंदावन प्रवास के दौरान प्रख्यात आध्यात्मिक संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की. इस अवसर पर दोनों संतों के बीच विश्व शांति, शांति शिक्षा, अंतरधार्मिक सहयोग तथा युवाओं के आध्यात्मिक विकास जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों पर गहन एवं सार्थक चर्चा हुई.
धर्म और अध्यात्म का समन्वय ही स्थायी शांति का मार्ग
इस संवाद के दौरान दोनों संत इस निष्कर्ष पर सहमत दिखाई दिए कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित न रखकर अध्यात्म से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है. उनका मानना था कि अध्यात्म ही वह आधार है जो मानव चेतना को जागृत कर वैश्विक शांति का स्थायी मार्ग प्रशस्त कर सकता है.
यूक्रेन-रूस संघर्ष पर संतों की संवेदनशील प्रतिक्रिया
जैन आचार्य लोकेश ने इस अवसर पर कहा, “यूक्रेन-रूस संघर्ष को समाप्त करने के लिए पूरी निष्ठा और गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं. आप सभी प्रार्थना करें कि ये प्रयास शीघ्र सफल हों और विश्व को इस पीड़ा से मुक्ति मिले.” इस पर प्रेमानंद जी महाराज ने उत्तर देते हुए कहा कि, “विश्व शांति केवल कूटनीति या नीतियों से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के जागरण से ही संभव है.”
मानव मन की शुद्धता से ही विश्व शांति संभव
प्रेमानंद जी महाराज ने कहा, “नीतियों से मात्र विश्व शांति स्थापित नहीं हो सकती. जब तक मानव मन शुद्ध और करुणा से परिपूर्ण नहीं होगा, तब तक समाज, राष्ट्र और विश्व में स्थायी शांति संभव नहीं है. आज सबसे अधिक आवश्यकता युवाओं को प्रेम, सेवा और करुणा आधारित आध्यात्मिक मार्ग से जोड़ने की है.”
अहिंसा को जीवन-पद्धति बनाने का आह्वान
जैन आचार्य लोकेश ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “अहिंसा केवल एक दर्शन या विचार नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-पद्धति है. विश्व शांति के लिए अंतरधार्मिक संवाद, करुणा और सहयोग को संस्थागत रूप देना आवश्यक है. साथ ही शांति शिक्षा को औपचारिक शिक्षा प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए.”
युवाओं के लिए शांति और नेतृत्व कार्यक्रमों की आवश्यकता
चर्चा के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि युवाओं के लिए आध्यात्मिक नेतृत्व कार्यक्रम शुरू किए जाएं, तथा विद्यालयों और महाविद्यालयों में नैतिक शिक्षा और शांति-आधारित पाठ्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि भविष्य की पीढ़ी अधिक संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार बन सके.
बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच प्रेरणादायक पहल
यह भेंट ऐसे समय में हुई है जब विश्वभर में तनाव, हिंसा और वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है. ऐसे दौर में जैन आचार्य लोकेश और प्रेमानंद जी महाराज का यह आध्यात्मिक संवाद समाज में सद्भाव, करुणा और शांति को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक पहल के रूप में देखा जा रहा है.
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