Premanand Ji Maharaj Quotes on Attachment:संत प्रेमानंद जी महाराज ने मोह और आसक्ति को लेकर एक गहरा संदेश दिया. उन्होंने बताया कि व्यक्ति, वस्तु और स्थान के प्रति अत्यधिक लगाव मन को कमजोर बनाता है, जबकि भगवान का नाम जप करने से मन और बुद्धि को नई दिशा देता है. उनका यह उपदेश उन लोगों के लिए खास है जो मानसिक अशांति और भावनात्मक जुड़ाव से बाहर निकलना चाहते हैं.
मोह से मुक्ति कैसे पाएं? पढ़ें प्रेमानंद जी महाराज के विचार (Premanand Ji Maharaj Quotes on Attachment)
- प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान से मन हटाना आसान नहीं होता – इसके लिए आंतरिक सामर्थ्य (Internal Strength) की आवश्यकता होती है.
- यह क्षमता (Internal Strength) केवल अपनी कोशिश से नहीं, बल्कि भगवान से प्रार्थना और कृपा से प्राप्त होती है. इसलिए रोज प्रार्थना करना जरूरी बताया गया है.
- प्रेमानंद जी महाराज कहते है कि भगवान से यह प्रार्थना करें कि हमारी बुद्धि में ऐसा ज्ञान आए जिससे मोहासक्त चित्त हटकर ईश्वर में लग सके.
- महाराज जी ने स्पष्ट किया कि मन को खाली नहीं छोड़ा जा सकता. अगर मन को एक जगह से हटाया है तो उसे सही और पवित्र दिशा देना जरूरी है.
- यदि मन को एक वस्तु से हटाकर दूसरी सांसारिक वस्तु में लगा दिया जाए, तो आसक्ति खत्म नहीं होती – सिर्फ बदलती है.
- इसलिए मन को भगवान के नाम, भक्ति और नाम जप में लगाना ही श्रेष्ठ उपाय है.
- नाम जप को प्रेमानंद जी महाराज ने सबसे सरल, सुलभ और प्रभावी साधना बताया, जो मन और बुद्धि दोनों को स्थिर करती है.
- नियमित नाम जप से मन को नया आधार मिलता है और भावनात्मक निर्भरता धीरे-धीरे कम होने लगती है.
- प्रेमानंद जी महाराज का संदेश है कि मोह से मुक्ति का मार्ग कठिन नहीं, यदि व्यक्ति सच्चे मन से प्रार्थना और नाम स्मरण को जीवन में उतार ले.
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