क्या आपका बच्चा पढ़ाई से दूर भागने की करता है कोशिश? डांटें या धमकाएं नहीं, अपनाएं ये आसान तरीके

Parenting Tips: बच्चों को पढ़ाई के लिए तैयार करना सिर्फ नियम बनाने का नहीं, बल्कि सही माहौल और सही सोच डेवलप करने का काम भी है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अपनी जिम्मेदारियों को खुद समझे और पढ़ाई को लेकर ज्यादा पॉजिटिव बने, तो कुछ छोटी लेकिन असरदार पैरेंटिंग आदतें इसमें आपकी काफी मदद कर सकती हैं.

Parenting Tips: क्या आपको अपने बच्चे को हर समय यह कहते रहना पड़ता है कि, ‘पढ़ाई कर लो’, ‘होमवर्क पूरा किया या नहीं?’, ‘कितनी बार कहना पड़ेगा?’, तो आप इकलौते पैरेंट्स नहीं है जो इस समस्या से आये दिन जूझते हैं. ज्यादातर माता-पिता इस प्रॉब्लम का सामना करते हैं कि उनका बच्चा खुद पढ़ाई करने के लिए तैयार ही नहीं होता है और उन्हें हर बार अपने बच्चे को पढ़ाई करने के लिए याद दिलाते रहना पड़ता है. हर बार ऐसा होते रहने की वजह से पैरेंस्ट और बच्चे के बीच स्ट्रेस और झुंझलाहट भी बढ़ने लगती है. अगर आपके बच्चे की भी यही आदत है, तो आपको उसे बार-बार डांटने या फिर उसपर सख्ती दिखने से बचना चाहिए. बच्चे को डांटना या फिर उसे जबरदस्ती पढ़ने के लिए फोर्स करना कभी भी सही नहीं माना जाता है. अगर आप चाहें तो कुछ आसान और समझदारी भरे ट्रिक्स अपनाकर भी अपने बच्चे के अंदर पढ़ाई के प्रति इंटरेस्ट पैदा कर सकते हैं. जब आप इन ट्रिक्स को अपनाएंगे तो आपका बच्चा बिना बार-बार कहे ही अपनी जिम्मेदारियों को समझने लगेगा और खुद ही पढ़ाई करने के लिए भी बैठ जाया करेगा. तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

पढ़ाई को बोझ नहीं, आदत बनाने की कोशिश करें

अक्सर ऐसा होता है कि बच्चे पढ़ाई को एक जिम्मेदारी या फिर एक प्रेशर की तरह देखने लग जाते हैं. ऐसा न हो इसलिए सबसे जरूरी हो जाता है कि पढ़ाई करने की आदत को उनकी डेली रूटीन का ही एक हिस्सा बनाया जाए. अपने बच्चे को हर दिन एक फिक्स्ड टाइम पर पढ़ाई करने के लिए बैठाएं. जब उसे इस चीज की आदत लगने लगेगी तो वह खुद उस समय पढ़ाई करने के लिए बैठ जाया करेगा. एक फिक्स्ड रूटीन से बच्चे के अंदर डिसिप्लिन डेवलप करने में मदद मिल सकती है.

छोटे-छोटे टार्गेट्स सेट करें

कई बार ऐसा भी होता है कि आपका बच्चा अपना पूरा सिलेबस या फिर ढेर सारा होमवर्क देखकर घबरा जाता है. उसके अंदर डर बैठ जाता है कि इतना सारा काम आखिर वह करेगा कैसे. अगर आपके बच्चे के साथ ऐसा है, तो सबसे पहले उसे छोटे-छोटे टार्गेट्स पूरा करने के लिए मोटिवेट करें. उदाहरण के लिए पहले उसे एक चैप्टर पूरा करने या फिर कुछ सवालों का जवाब ढूंढने का टारगेट दें. जब आपका बच्चा एक टारगेट अचीव कर ले, तो बिना कंजूसी किये उसकी तारीफ करें. जब आप ऐसा करते हैं तो उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और पढ़ाई के प्रति उसका इंटरेस्ट भी जागता है.

बच्चे की तुलना करने से बचें

कई पैरेंट्स की यह आदत होती है कि वे अपने बच्चे की तुलना उसके अपने भाई-बहनों, दोस्तों या फिर रिश्तेदारों के बच्चों के साथ करते रहते हैं. अगर आपकी भी यही आदत है तो इसकी वजह से भी बच्चे का मनोबल बढ़ने की जगह पर टूट सकता है. आपको खुद इस बात को पहले समझना होगा कि हर बच्चे की सीखने की रफ्तार और कैपिसिटी बिलकुल ही अलग होती है. इसलिए आपको अपने बच्चे की तुलना करने की जगह पर उसके प्रोग्रेस पर ध्यान देना चाहिए. आपको अपने बच्चे को हमेशा जीवन में बेहतर करने के लिए मोटिवेट करते रहना चाहिए.

बच्चे के इंटरेस्ट को समझें

हमनें आपको पहले भी बताया कि हर बच्चा एक जैसा नहीं होता है. किसी बच्चे को मैथ्स पसंद होता है तो कोई ड्रॉइंग और आर्ट्स में इंटरेस्ट रखता है. आपको सबसे पहले अपने बच्चे के इंटरेस्ट को समझना चाहिए और फिर पढ़ाई को ही उससे जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए. जब आपके बच्चे को चीजें सीखने में मजा आने लगेगा, तो वह खुद पढ़ाई करने के लिए आगे आएगा.

सिर्फ मार्क्स नहीं, कोशिशों की भी तारीफ करें

अक्सर पैरेंट्स यह गलती करते हैं कि वे अच्छे मार्क्स आने पर ही अपने बच्चे की तारीफ करते हैं. अगर आप भी इन्हीं पैरेंट्स में से हैं, तो आपको अपना नजरिया अब बदल लेना चाहिए. आपको अपने बच्चे की मेहनत, समय पर पढ़ाई करने की आदत और किसी खास सब्जेक्ट में अगर उसने अच्छा किया है, तो इसकी भी तारीफ करनी चाहिए. जब आप ऐसा करते हैं तो आपके बच्चे को पॉजिटिव फील होता है और वह आगे भी मेहनत करने के लिए मोटिवेटेड रहता है.

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Published by: Saurabh Poddar

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