साड़ियों का है एवरग्रीन फैशन, ये हैं इंडिया की वर्ल्ड फेमस साड़ियां

Saris of India: फैशन वक्त के साथ बदलता रहता है कपड़ों से लेकर जूतें फैशन के ट्रेंड के साथ बदलते रहते हैं. लेकिन एक चीज का फैशन एवरग्रीन है वो है साड़ी. यह एक ऐसा परिधान है जिसे किसी भी रंग रूप की महिला पहने वो कुछ और ही संवर जाती है. जानिए भारत की कुछ प्रसिद्ध सड़ियों की वेरायटी के बारे में.

Saris of India: भारत की पहचान यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है. हर प्रांत की अपनी खास जीवन शैली है और उसका खास परिधान है. प्रत्येक क्षेत्र में पारंपरिक कपड़ों की अपनी अनूठी शैली है, जिसमें साड़ियों की क्षेत्रीय विविधताएं भी शामिल हैं. साड़ी भारत में महिलाओं के लिए एक पसंदीदा पोशाक है कुछ खास साड़ियों को अलग- अलग अवसरों, त्योहारों और समारोहों में पहना जाता है. जानिए भारत की कौन कौन सी हैं प्रसिद्ध क्षेत्रीय साड़ियां.

बनारसी साड़ी

बनारसी साड़ियाँ अपनी भव्यता और जटिल डिजाइन के लिए पूरी दुनिया में फेमस है. इन साड़ियों का निर्माण उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तैयार किया जाता है. इन साड़ियों में अक्सर सोने या चांदी के ब्रोकेड का काम, पुष्प रूपांकनों और जटिल बुनाई पैटर्न होते हैं, बनारसी साड़ियों की सबसे अधिक डिमांड शादी के सीजन में और विशेष अवसरों पर अधिक होती है.

कांजीवरम साड़ी

अपने जीवंत रंगों, भारी रेशमी कपड़े और उत्तम ज़री के काम के लिए तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर की कांजीवरम साड़ियाँ काफी प्रसिद्ध हैं. इन साड़ियों में अक्सर मंदिर-प्रेरित डिज़ाइन, चेक, धारियां और फ्लावर पैटर्न होते हैं. ये साड़ीे दक्षिण भारतीय शादियों और त्योहारों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है.

बंधनी/बंधेज साड़ी

गुजरात की बंधनी साड़ियां टाई-एंड-डाई वस्त्र हैं जो कई रंगों और पैटर्न में आती हैं इन्हें कपड़े के छोटे-छोटे हिस्सों को धागों से बांधकर और फिर जटिल पैटर्न बनाने के लिए रंगकर बनाया जाता है. ये साड़ियाँ आमतौर पर उत्सवों और शादियों के दौरान गुजरात और राजस्थान में काफी पहनी जाती है.

पटोला साड़ी

पटोला साड़ी को डबल इकत तकनीक का उपयोग करके हाथ से बुना जाता है, जहां बुनाई से पहले ताना और बाना दोनों धागों को टाई-डाई किया जाता है. यह गुजरात का एक और उत्कृष्ट कपड़ा है. इसकी खासियत इसका जियोमेट्रिक पैटर्न और जीवंत रंग है.

चंदेरी साड़ी

मध्य प्रदेश के चंदेरी शहर से चंदेरी साड़ियां बनाने की शुरूआत हुई. ये हल्की और पारदर्शी साड़ियां आमतौर पर रेशम, कपास या दोनों के मिश्रण से बनाई जाती है. वे अपनी नाजुक ज़री सीमाओं और फूल या जियोमेट्रिक पैटन के लिए पहचानी जाती है.

असम सिल्क (असम)

असम अपनी समृद्ध रेशम साड़ियों, विशेष रूप से मुगा रेशम और एरी रेशम किस्मों के लिए प्रसिद्ध है. मुगा सिल्क साड़ियों में प्राकृतिक सुनहरा रंग होता है और वे बहुत ही टिकाऊ होती हैं, जबकि एरी सिल्क साड़ियाँ नरम और गर्म होती हैं.

बंगाली तांत साड़ी

तांत साड़ियां पश्चिम बंगाल में लोकप्रिय हैं और आमतौर पर कपास से बनाई जाती हैं. अपने हल्केपन और आराम के लिए इसकी अपनी अलग पहचान है जो उन्हें रोजमर्रा पहनने के लिए सबसे पसंदीदा साड़ी बनाता है. तांत साड़ियों में अक्सर जीवंत रंगों में धारीदार या चेकर पैटर्न होते हैं.

पैठानी साड़ी

महाराष्ट्र की पैठानी साड़ियां चमकदार रेशम और सोने के धागे के काम से तैयार की जाती है. जटिल मोर और फूल के डिजाइन इसकी खासियत है.

संबलपुरी साड़ी

ओडिशा की फेमस संबलपुरी साड़ियां अपने अनूठे टाई-एंड-डाई पैटर्न के लिए जानी जाती हैं. रंगों और डिज़ाइनों की इसकी एक विस्तृत श्रृंखला है. ये साड़ियां अक्सर सूती और रेशम दोनों धागों से बनाई जाती है.

ये कुछ फेमस साड़ियां हैं जिसे हर महिला अपने वार्डरोब का हिस्सा बनाना चाहती है. साड़ी सिर्फ परिधान नहीं है बल्कि इसने अपने आंचल में भारत की संस्कृति को समेट रखा है.

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By Meenakshi Rai

Meenakshi Rai is a contributor at Prabhat Khabar.

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