Cleaning Tips: अक्सर हम अपने महंगे और पसंदीदा सफेद कपड़ों को सिर्फ इसलिए अलमारी के किसी कोने में रख देते हैं, क्योंकि वे समय के साथ पीले पड़ने लगते हैं. चाहे ऑफिस की शर्ट हो या आपका कोई खास सूट, पसीने और धूल-मिट्टी की वजह से उनकी चमक खो जाती है. बाज़ार में मिलने वाले महंगे ब्लीच और केमिकल कभी-कभी कपड़ों के धागों को कमजोर कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रसोई में ही कुछ ऐसी चीजें मौजूद हैं, जो आपके पुराने और पीले पड़ चुके कपड़ों को फिर से नए जैसा चमका सकती हैं? आज हम आपको बताएंगे सफेद कपड़ों का पीलापन दूर करने के कुछ ऐसे आसान और जादुई तरीके, जिन्हें अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत के अपने कपड़ों में वही पुरानी चमक वापस ला सकते हैं.
नींबू और गर्म पानी
नींबू एक नेचुरल ब्लीचिंग एजेंट की तरह काम करता है. अगर आपके सफेद कपड़ों पर पसीने के पीले दाग लग गए हैं, तो एक बाल्टी गर्म पानी में दो नींबू का रस मिलाएं. अब इसमें अपने कपड़ों को कम से कम 1 घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद सादे पानी से धो लें. आप देखेंगे कि कपड़ों का पीलापन काफी हद तक कम हो गया है.
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा न सिर्फ केक फुलाने के काम आता है, बल्कि यह कपड़ों की सफाई में भी नंबर-1 है. आधा कप बेकिंग सोडा अपने वॉशिंग पाउडर के साथ मिलाकर कपड़े धोएं. यह कपड़ों की दुर्गंध भी दूर करता है और जिद्दी पीले दागों को जड़ से साफ कर देता है.
सफेद सिरका (White Vinegar)
सफेद सिरका कपड़ों के रेशों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें चमकाता है. कपड़े धोते समय आखिरी बार खंगालते वक्त पानी में आधा कप सिरका मिला दें. इससे कपड़ों पर जमा डिटर्जेंट की परत भी हट जाती है और कपड़े एकदम सफेद और सॉफ्ट हो जाते हैं.
तेज धूप में सुखाना है जरूरी
सफेद कपड़ों को चमकाने के लिए सूरज की रोशनी सबसे अच्छा तरीका है. सूरज की यूवी किरणें (UV Rays) कपड़ों के दागों को हल्का करने में मदद करती हैं. सफेद कपड़ों को धोने के बाद हमेशा सीधी और तेज धूप में सुखाएं. इससे कपड़ों में एक अलग ही ताजगी आती है.
एस्पिरिन की गोलियां
शायद आपको जानकर हैरानी हो, लेकिन सिरदर्द की दवा ‘एस्पिरिन’ सफेद कपड़ों को चमका सकती है. 5-6 एस्पिरिन की गोलियों को गर्म पानी में घोलें और इसमें पीले कपड़ों को रातभर के लिए छोड़ दें. सुबह उन्हें सामान्य तरीके से धो लें, कपड़े बर्फ जैसे सफेद हो जाएंगे.
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
