Jitiya Vrat 2023 : जितिया का निर्जला व्रत करने जा रही हैं आप, जानिए सरगही में क्या खाएं क्या नहीं ?

Jitiya Vrat 2023: संतान की रक्षा की कामना के साथ आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन माताएं जितिया का व्रत रखती हैं. इस बार जितिया का पर्व पांच अक्टूबर को नहाय खाय से शुरू हो रहा है 6 अक्टूबर को जितिया व्रत और 7 अक्टूबर को पारण के साथ समाप्त होगा.उदया तिथि के अनुसार कुछ लोग 7 अक्टूबर को व्रत कर रहे हैं .

जितिया पूजन और उपवास को लेकर इस बार लोग काफी कन्फ्यूज हो रहे हैं. पंडित रामदेव के अनुसार जितिया व्रत 6 अक्टूबर को है . 7 अक्टूबर को दिन में 10:30 बजे के बाद पारण करें. जबकि सरगही 5 अक्टूबर की रात वाली सुबह की भोर सूर्योदय के पहले कर लें. इधर कई पंडितों के अनुसार कुछ लोग उदया तिथि को मानकर 7 अक्टूबर को निर्जला व्रत रख रही हैं. जितिया व्रत के दौरान दिनभर आपको प्यास ना लगे इसलिए सूर्याेदय से पहले सरगही का विधान है. इसमें आप कुछ ऐसी चीजों का सेवन कर सकती हैं जिससे व्रत के दौरान आपको कमजोरी न लगे. बाजार में कई मौसमी फल इस वक्त उपलब्ध हैं जैसे सेब , संतरा, केला , गाजर और खीरा. आप फलों का जूस भी पी सकती हैं .

माताएं छह अक्तूबर दिन शुक्रवार को जिउतिया व्रत रखेंगी. इस दिन कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा माता लक्ष्मी और मां दुर्गा के साथ की जाती है.व्रती महिलाएं पांच अक्टूबर को स्नान करने के बाद मड़ुआ रोटी, नोनी का साग, कंदा, झिगनी, करमी का सेवन करेंगी.

कई महिलाएं ग्लूकॉज वाटर भी पीती हैं जिन्हे भूखे रहने में समस्या होती है. इसके साथ छेना का रसगुल्ला भी खा सकती हैं. सरगही में नामक का सेवन नहीं करना चाहिए .

केला, दूध और दही गुड़ भी सरगही में खा सकती हैं इससे आपकी बॉडी में एनर्जी बनी रहेगी.

कई महिलाओं को दिनभर में कई बार चाय पीने की आदत होती है ऐसे में निर्जला व्रत में उनके सिर में काफी दर्द होने लगता है. इसलिए वे अगर सरगही में चाय पी लेतीं हैं तो व्रत करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. सरगही के वक्त आप अदरक या इलायची वाली चाय बनाकर पी सकती हैं.

जितिया के व्रत में बिना कुछ खाए और बिना पानी पीए रखना होता है ऐसे में नारियल पानी पीने से आप हाईड्रेटेड रहेंगी और व्रत के दिन आपको दिनभर प्यास नहीं लगेगी.

महिलाएं सरगही करने के बाद 28 घंटे तक पानी को अपने मुंह से भी नहीं लगाती हैं. यहां तक कि कुल्ला करना भी इस पर्व में वर्जित माना गया है.

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Author: Meenakshi Rai

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