80 और 90 के दशक में गोविंदा बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते थे. शानदार कॉमिक टाइमिंग, जबरदस्त डांस और अलग अंदाज की वजह से उन्होंने दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई. 'कुली नंबर 1', 'हीरो नंबर 1', 'दूल्हे राजा' और 'साजन चले ससुराल' जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉक्स ऑफिस का भरोसेमंद स्टार बना दिया था.
डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने तो कॉमेडी फिल्मों का एक अलग दौर ही शुरू कर दिया था. कादर खान, जॉनी लीवर और परेश रावल जैसे कलाकारों के साथ उनकी केमिस्ट्री भी खूब पसंद की गई. लेकिन जिस रफ्तार से गोविंदा सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, उसी तेजी से बाद में उनके करियर में बदलाव भी देखने को मिला.
राजनीति में एंट्री के बाद बदली करियर की दिशा
गोविंदा ने साल 2004 में राजनीति में कदम रखा. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. राजनीति में सक्रिय होने के बाद फिल्मों के लिए उनका समय और फोकस पहले जैसा नहीं रहा. इसी दौर में उनके सेट पर देर से पहुंचने जैसी खबरें भी सामने आने लगीं. इससे फिल्ममेकर्स के साथ उनके रिश्तों को लेकर सवाल उठने लगे. हालांकि, उनके करियर में गिरावट के पीछे सिर्फ एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा.
बॉलीवुड भी तेजी से बदल रहा था
2000 के दशक में हिंदी सिनेमा का अंदाज बदल रहा था. दर्शक नई कहानियां और अलग किरदार पसंद करने लगे थे. वहीं गोविंदा की पहचान मुख्य रूप से कॉमेडी और डांस से बनी हुई थी. कहा जाता है कि उन्होंने कुछ बड़ी फिल्मों के ऑफर भी ठुकराए. इनमें 'देवदास' में चुन्नीलाल का किरदार और 'गदर: एक प्रेम कथा' जैसी फिल्मों के नाम अक्सर लिए जाते हैं. इन फिल्मों की सफलता के बाद ऐसे फैसलों को लेकर गोविंदा के करियर पर चर्चा होती रही.
ये भी पढ़ें: सुनीता आहूजा को धोखा दिया तो भिखारी बन जाओगे... जब गोविंदा को इस शख्स ने दी थी वार्निंग
'पार्टनर' ने फिर दिलाई बड़ी सफलता
साल 2007 में गोविंदा ने सलमान खान के साथ 'पार्टनर' में काम किया. फिल्म में उनकी कॉमेडी और सलमान के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और गोविंदा को एक बार फिर बड़े पर्दे पर शानदार प्रतिक्रिया मिली. लेकिन इस सफलता के बाद भी उनका करियर पहले जैसी रफ्तार नहीं पकड़ सका. इसके बाद उन्होंने मुख्य भूमिकाओं को प्राथमिकता दी, जबकि बदलते दौर में कलाकारों के लिए सपोर्टिंग और कैरेक्टर रोल्स भी करियर को नई दिशा दे रहे थे.
'आ गया हीरो' से नहीं मिली उम्मीद के मुताबिक सफलता
गोविंदा ने सोलो हीरो के तौर पर अपनी वापसी की कोशिश जारी रखी. साल 2017 में आई फिल्म 'आ गया हीरो' से भी उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म दर्शकों पर खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी.
आज भी कायम है गोविंदा का स्टारडम
गोविंदा का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उन्होंने अपने दौर में जिस तरह की कॉमेडी, डांस और स्क्रीन प्रेजेंस दिखाई, उसकी बराबरी करना आज भी आसान नहीं है. भले ही उनका करियर एक समय के बाद पहले जैसी ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, लेकिन बॉलीवुड के 'हीरो नंबर 1' के तौर पर उनकी पहचान आज भी कायम है.
ये भी पढ़ें: Govinda Son Yashvrdhn Ahuja Debut: मां सुनीता आहूजा संग बॉलीवुड में कदम रखेंगे यशवर्धन, हॉरर-कॉमेडी से होगा डेब्यू
