Musafir Cafe Review: नेटफलिक्स की मोस्ट अवेटेड सीरीज मुसाफिर कैफे आज रिलीज हो गई है. सोशल मीडिया पर सीरीज को लेकर क्रिटिक्स और व्यूवर्स के बीच मिक्स रिएक्शन देखने को मिल रहा है. बता दें, यह सीरीज बेस्ट सेलर रही किताब मुसाफिर कैफे का ही वीजुअल अडैप्टेशन है. अब जानते हैं कि इस किताब के मुख्य राइटर दिव्य प्रकाश दूबे को यह सीरीज कितनी पसंद आई है.
लेखक दिव्य प्रकाश दूबे को कैसी लगी सीरीज?
प्रभात खबर डॉट इन से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान दिव्य ने बताया,
'मैंने बस एक ही ऐपिसोड ही देखा है. अब तक तो मुझे पसंद आई है और कहानी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं दिख रहा है. लेकिन बेहतर तरीके से रिव्यू सीरीज को देखकर ही दे पाऊंगा.'
Musafir Cafe Cameo: सीरीज में दिखेंगे खुद दिव्य प्रकाश दूबे
दिव्य आगे बताते हैं,
"इस सीरीज में मेरे फैंस को एक बड़ा सरप्राइज मिलने वाला है. फैंस यहां मुझे कैमियो करते हुए देखेंगे. मेकर्स का मानना था कि मेरी मौजूदगी उन्हें इमोशनल कर सकती है."
Musafir Cafe Adaptation: क्या कहानी बदलने को लेकर हुआ था विवाद?
किताब के लेखक और डायरेक्टर्स के बीच कई क्रिएटिव डिफरेंस रहे हैं. जब मेघना गुलजार की फिल्म 'राजी' रिलीज हुई थी, तो उस वक्त भी राइटर हरिंदर एस सिक्का ने इंटरव्यू के दौरान यह इल्जाम लगाया था कि उनकी कहानी को गलत तरीके के प्रोजेक्ट किया गया था. ऐसे में फ्यूचर में इस तरह की कोई मतभेद न हो, इससे बचने के लिए डायरेक्टर व प्रोड्यूसर एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाते हैं. क्या दिव्य की भी ऐसे किसी अग्रीमेंट का हिस्सा बनना पड़ा था?
जवाब में दिव्य कहते हैं,
'बिलकुल, लेकिन मेरा इन्वॉल्वमेंट इस सीरीज पर शूटिंग के आखिरी दिन तक था. मुझे रोजाना सेट पर बुलाया जाता था. देखिए, किसी भी कहानी के विजुअल अडैप्टेशन के दौरान थोड़ी बहुत क्रएटिव लिबर्टी तो लेनी ही पड़ती है. ओवरऑल इस प्रोडक्ट से मैं संतुष्ट हूं और कास्टिंग भी मुझे कमाल की लगी. मुझे नहीं लगता विक्रांत से बेहतर चंदर का किरदार कोई भी कर सकता था.'
यह भी पढ़ें- Jana Nayagan Review: थलापति विजय की आखिरी फिल्म देखकर तृषा कृष्णन की मां हुईं इमोशनल, कहा- हम उन्हें मिस करेंगे
