- कास्ट: तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, छाया कदम, स्वास्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ, जतिन सरना, प्रशांत नारायणन, चंदन रॉय
- डायरेक्टर: देवाशीष मखीजा
- प्रोड्यूसर: कनिका ढिल्लों
- ड्यूरेशन: 1 घंटा 55 मिनट
- रिलीज डेट: 3 सितंबर 2026
- प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स
- रेटिंग: 3
Gandhari Movie Review: महाभारत की गांधारी को हम सभी जानते हैं. उन्होंने अपने पति धृतराष्ट्र के अंधे होने के बाद अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी. लेकिन नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘गांधारी’ में यही पट्टी एक अलग कहानी कहती है.
यहां पट्टी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत का प्रतीक बन जाती है. फिल्म की कहानी एक ऐसी मां बानी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी बेटी उससे छिन जाती है. अपनी बच्ची को वापस पाने के लिए वह ऐसी दुनिया में उतरती है, जहां हर कदम पर खतरा है.
कनिका ढिल्लों की लिखी यह कहानी सिर्फ एक मां के अपनी बेटी को खोजने की कहानी नहीं है. इसमें एक्शन, रहस्य, अपराध और इमोशन को भी साथ रखा गया है.
क्या है ‘गांधारी’ की कहानी?
फिल्म की शुरुआत पश्चिम बंगाल के जॉयपुरा रेलवे स्टेशन से होती है. बानी और उसका पति अपनी छोटी बच्ची के साथ ट्रेन में सफर कर रहे होते हैं. तभी एक रहस्यमयी महिला उनकी बच्ची को लेकर गायब हो जाती है.
अपनी बेटी के पीछे भागते हुए बानी एक लोहे की चीज से टकरा जाती है. इस हादसे के बाद उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है.
लेकिन बेटी के गायब होने का दर्द उसके लिए इससे कहीं बड़ा है. वह पुलिस के पास पहुंचती है, लेकिन उसे वह मदद नहीं मिलती जिसकी उसे उम्मीद होती है. स्थानीय पुलिस मामले को लेकर बहुत गंभीर नजर नहीं आती.
इसके बाद मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की एंट्री होती है. उसे जल्द ही समझ आता है कि जॉयपुरा में सिर्फ एक बच्ची के गायब होने की कहानी नहीं है. शहर में बच्चियों के अपहरण और तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क चल रहा है.
इस नेटवर्क का नाम है ‘ऑपरेशन ब्लैक होल’, जिसका सरगना प्रशांत नारायणन का किरदार है.
अब बानी के सामने सिर्फ अपनी बेटी को ढूंढने की चुनौती नहीं है. उसे उस पूरे नेटवर्क का सामना करना है, जो कई मासूम बच्चियों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है.
बानी अपनी बेटी के लिए बन जाती है योद्धा
‘गांधारी’ की सबसे बड़ी खासियत यही है कि बानी को सिर्फ एक परेशान मां बनाकर नहीं दिखाया गया है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसका दर्द गुस्से में बदलता है और यही गुस्सा उसे लड़ने की ताकत देता है.
जॉयपुरा भी फिल्म में सिर्फ एक जगह नहीं है. शहर के अंदर मौजूद अलग-अलग किरदार और उनके राज कहानी को और उलझाते जाते हैं.
ऊपर से चौमुखी माता का मेला करीब आ रहा है और इसी दौरान कुछ बड़ा होने वाला है. ऐसे में बानी के सामने वक्त भी कम है और खतरा भी बढ़ता जा रहा है.
अब सवाल यही है कि क्या बानी अपनी बेटी मिष्टी को ढूंढ पाएगी? क्या पुलिस इस खतरनाक गिरोह तक पहुंच पाएगी? और जॉयपुरा के अतीत में छिपे कौन से राज इस पूरी कहानी से जुड़े हैं?
इन्हीं सवालों के जवाब फिल्म को आगे लेकर जाते हैं.
तापसी पन्नू ने फिर छोड़ी अपनी छाप
बानी के किरदार में तापसी पन्नू फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. वह एक ऐसी मां का किरदार निभाती हैं, जिसके अंदर एक साथ डर, दर्द, गुस्सा और अपनी बच्ची को बचाने की जिद है.
तापसी के किरदार की खास बात यह है कि वह हर वक्त सिर्फ डायलॉग के जरिए अपनी भावनाएं नहीं बतातीं. कई जगह उनके चेहरे के एक्सप्रेशन और आंखों के हावभाव ही बहुत कुछ कह देते हैं.
एक्शन सीन्स में भी तापसी काफी प्रभावी लगती हैं. उनका किरदार कमजोर हालात के बावजूद हार मानने को तैयार नहीं है. यही बात बानी को बाकी एक्शन हीरोइनों से थोड़ा अलग बनाती है.
इश्वाक सिंह और बाकी कलाकारों का कैसा है काम?
इश्वाक सिंह फिल्म में बानी के पति और मिष्टी के पिता के किरदार में नजर आते हैं. उनका किरदार कहानी के इमोशनल हिस्से को मजबूत करता है और वह कई जगह सरप्राइज करते हैं.
जतिन सरना पुलिस अधिकारी के रोल में अच्छे लगते हैं. उनके किरदार में गंभीरता है और वह कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं.
प्रशांत नारायणन ने विलेन के रूप में अच्छा काम किया है. उनका किरदार कहानी में डर और तनाव बनाए रखता है.
मीता वशिष्ठ, छाया कदम, स्वास्तिका मुखर्जी और चंदन रॉय समेत बाकी कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में फिट बैठते हैं. अच्छी बात यह है कि फिल्म में सपोर्टिंग कास्ट सिर्फ नाम के लिए नहीं है. ज्यादातर किरदार कहानी में कुछ न कुछ जोड़ते हैं.
कनिका ढिल्लों की कहानी है फिल्म की असली ताकत
‘गांधारी’ की सबसे मजबूत चीज इसका लेखन है. कनिका ढिल्लों ने महाभारत के गांधारी वाले कॉन्सेप्ट से प्रेरणा लेकर एक मॉडर्न महिला-केंद्रित एक्शन थ्रिलर तैयार की है.
कहानी को सिर्फ ‘बेटी गायब हुई और मां उसे ढूंढने निकली’ तक सीमित नहीं रखा गया है. इसके आसपास अपराध, रहस्य, पुराने राज और कई किरदारों की अलग-अलग कहानियां जोड़ी गई हैं.
फिल्म में ट्विस्ट लगातार आते हैं. जब आपको लगता है कि अब आगे क्या होने वाला है, तभी कहानी एक नया मोड़ ले लेती है.
यही चीज फिल्म को बोर होने से बचाती है.
देवाशीष मखीजा का निर्देशन कैसा है?
डायरेक्टर देवाशीष मखीजा ने फिल्म में एक्शन और इमोशन के बीच अच्छा बैलेंस रखा है. कहानी में मां-बेटी का इमोशनल कनेक्शन भी है और अपराध की दुनिया का तनाव भी.
जॉयपुरा की दुनिया को जिस तरह फिल्म का हिस्सा बनाया गया है, वह भी अच्छा लगता है. शहर का माहौल और वहां के किरदार कहानी को थोड़ा और रहस्यमयी बनाते हैं.
एक्शन भी सिर्फ दिखावे के लिए नहीं लगता. बानी अपने आसपास की चीजों का इस्तेमाल करके लड़ती है, जिससे एक्शन उसके किरदार और कहानी का स्वाभाविक हिस्सा लगता है.
कहां थोड़ी और बेहतर हो सकती थी फिल्म?
फिल्म की कहानी और ट्विस्ट इसे बांधकर रखते हैं, लेकिन कुछ जगह कहानी में इतनी सारी परतें एक साथ खुलती हैं कि दर्शक को थोड़ा ध्यान लगाकर देखना पड़ता है.
फिर भी फिल्म की करीब 1 घंटा 55 मिनट की लंबाई इसे ज्यादा खिंचने नहीं देती. कहानी तेजी से आगे बढ़ती है और ज्यादातर समय आपका ध्यान बनाए रखती है.
Final Verdict: देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आपको एक्शन, मिस्ट्री और इमोशन वाली फिल्में पसंद हैं, तो ‘गांधारी’ आपको पसंद आ सकती है. फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और तापसी पन्नू का अभिनय है.
कनिका ढिल्लों ने एक मां के दर्द को सिर्फ इमोशनल कहानी नहीं बनाया, बल्कि उसे एक ऐसी महिला की लड़ाई में बदल दिया है, जो अपनी बेटी को बचाने के लिए किसी भी खतरे के सामने खड़ी हो सकती है.
तापसी ने बानी के गुस्से, दर्द और बेबसी को अच्छी तरह पर्दे पर उतारा है. वहीं देवाशीष मखीजा का निर्देशन कहानी को सही रफ्तार देता है.
